
संस्कृति की रक्षा होगी, तभी जाकर सनातन राष्ट्र की निर्मिति संभव है । सनातन संस्था संस्कृति-संवर्धन का कार्य कर रही है । पूरे विश्व में यदि कोई सत्यनिष्ठ एवं हिन्दुत्वनिष्ठ संस्था है, तो वह है सनातन संस्था । मैं जब कर्णावती (गुजरात) में रहता था, उस समय सनातन के साधक अनेक वर्षाें तक मेरे घर आते थे । उस समय मेरे बच्चे बहुत छोटे थे । सनातन संस्था जिस प्रकार संस्कृति-संवर्धन का कार्य कर रही है, उसकी देश को आवश्यकता है । मैं ३३ वर्षाें तक ‘इंडिया टुडे’ में कार्यरत था । गुजरात में होते समय तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मेरा संवाद था । वे जब प्रधानमंत्री बनकर देहली गए, उस समय मुझे भी ‘इंडिया टुडे’ के देहली कार्यालय बुलाया गया । इसके लिए मैंने सनातन का पक्ष रखने का निश्चय किया !
वर्ष २०१८ में मुसलमानों तथा कुछ लोगों ने सनातन संस्था पर प्रतिबंध लगाने की मांग की । सनातन संस्था जिस प्रकार संस्कार-संवर्धन का कार्य कर रही है, उसे देखते हुए संस्था के संकट के काल में उसका सत्य पक्ष समाज के सामने रखना मैंने सुनिश्चित किया । ‘इंडिया टुडे’ एक सेक्युलर समाचार पत्र है । सेक्युलर विचारधारा की अपेक्षा एक भिन्न आवाज हो; इसके लिए मुझे ‘इंडिया टुडे’ में रखा गया था । सनातन संस्था पर जब प्रतिबंध लगाने की मांग की गई, उस समय ‘इंडिया टुडे’ के ‘डिजिटल प्लेटफॉर्म’ पर मैंने सनातन संस्था के विषय में लेख लिखा । उसमें मैंने लिखा है, ‘सनातन संस्था के साहित्य में कहीं भी हिंसा को प्रोत्साहन नहीं दिया गया है । सनातन संस्था संस्कृति सिंचाई का कार्य कर रही है । किसी प्रकरण में बंदी बनाए गए यदि सनातन के साधक हों, तो उस विषय में कानूनी प्रक्रिया होगी; परंतु उसके लिए सनातन संस्था के कार्य को आपत्तिजनक ठहराया नहीं जा सकता । सनातन संस्था का कार्य देश एवं समाज के लिए बहुत अच्छा है । प्रतिबंध लगाने की मांग करनी ही हो, तो वह ‘देवबंद’, ‘तबलीगी जमात’ जैसे आतंकी विचारधारावाले तथा धर्मांधता को प्रोत्साहन देनेवाले संगठनों के लिए करनी चाहिए, जो मुसलमानों को कट्टरतावाद की ओर ले जा रहे हैं ।’ मैंने सनातन संस्था के विषय में मेरा यह मत ‘आज तक’ समाचार वाहिनी पर आयोजित परिचर्चा में भी रखा ।
सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव कलियुग के सात्त्विक लोगों का समूह !सनातन संस्था का कार्य अद्वितीय है । सनातन संस्था के कार्य की तुलना की जा सके, ऐसा कोई भी उदाहरण नहीं है । सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव तो कलियुग में जितने भी सात्त्विक लोगों का समूह है, उनका समारोह है । जो राजनीतिक व्यक्ति इस कार्यक्रम में नहीं आ पाए, वह उनका दुर्भाग्य है । |
सनातन राष्ट्र-निर्मिति हेतु ‘पोर्नाेग्राफी’ का सांस्कृतिक आतंकवाद रोकना पडेगा ! – उदय माहुरकर

सांस्कृतिक दृष्टि से दरिद्र रहे, तो महासत्ता बनकर हमारा क्या उपयोग ?
मैं ३ वर्ष तक केंद्रीय सूचना आयुक्त रहा । इस अवधि में मैंने १४ सहस्र ४०० अपीलों का निपटारा किया, जो एक कीर्तिमान सिद्ध हुआ । मैंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रशासन के विषय पर २ तथा उसके उपरांत वीर सावरकर पर आधारित ३ पुस्तक लिखे । उसके उपरांत मुझे यह प्रतीत हुआ कि देश की स्थिति अत्यंत बुरी है । देश के सामने बहुत बडी चुनौती है – सांस्कृतिक आक्रमण । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष २०४७ तक भारत को विकसित देश बनाने का लक्ष्य सुनिश्चित किया है । यह ध्येय साध्य करते समय देश सैनिकी महासत्ता एवं आर्थिक महासत्ता बनेगा; परंतु महासत्ता बनकर भारत सांस्कृतिक दृष्टि से दरिद्री तो नहीं बन जाएगा ?, यह प्रश्न है ।
देश के सामने की चुनौती !
जिस प्रकार ‘ओटीटी’ एवं अन्य सामाजिक प्रसारमाध्यमों से ‘पोर्नाेग्राफी’ दिखाई जा रही है, वह अत्यंत गंभीर है । पिछले ६ महिने में भाई के बहन से बलात्कार करने की १० घटनाएं हुईं । पिता द्वारा लडकी से बलात्कार करने की ४ घटनाएं हुईं, जबकि महाराणा प्रताप की भूमि के रूप में जाने जानेवाले राजस्थान में मदिरासेवन कर प्रोर्नाेगाफी देखकर लडके द्वारा मां से बलात्कार करने की अत्यंत घिनौनी घटना हुई । ‘ओटीटी’, ‘अल्ट बालाजी’, नेटफ्लिक्स, एक्स आदि अनेक माध्यमों से पोर्नाेग्राफी दिखाई जा रही है । इसके कारण बलात्कार की घटनाओं में वृद्धि हुई है । बलात्कार की बढती घटनाएं पोर्नाेग्राफी का एक परिणाम तो है ही; परंतु उसके अतिरिक्त विवाह विच्छेद होना, छोटे बच्चों द्वारा एक-दूसरे से बलात्कार किए जाने जैसी घटनाएं हो रही हैं । छोटे बच्चों से लेकर सभी आयुसमूह के व्यक्तियों के पास उपलब्ध स्मार्टफोन के माध्यम से ‘पोर्नाेग्राफी’ सभी तक पहुंच गई है । यह देश के सामने बडी चुनौती है । ‘सनातन राष्ट्र-स्थापना के कार्य में संस्कृति-भंजन का यह संकट एक बडी चुनौती है ।
पुलिस द्वारा अपराध पंजीकृत किया जाना गंभीर !
‘एक्स’, ‘अल्ट’, ‘बालाजी’ एवं ‘नेटफ्लिक्स’, इन माध्यमों पर दिखाई जा रही पोर्नाेग्राफी के विरुद्ध मैंने देहली पुलिस में अपराध पंजीकृत करने का प्रयास किया; परंतु पुलिस ने अपराध पंजीकृत नहीं किया । देहली में हिन्दुत्वनिष्ठ सरकार होते हुए भी पुलिस द्वारा अपराध पंजीकृत न करने की स्थिति अत्यंत गंभीर है । इससे समझ में आता है कि इन माध्यमों की शक्ति कितनी है । पुलिस द्वारा शिकायत पंजीकृत न कर लेने के कारण मैंने सर्वाेच्च न्यायालय के अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन, संजीव नेवर एवं पत्रकार स्वाती गोवल शर्मा के साथ न्यायालय में अभियोग प्रविष्ट किया । इस प्रकरण में अधिवक्ता विष्णु शंकर जैन के प्रयासों से संबंधित लोगों को नोटिस भेजा गया । इसमें सरकार की ओर से हमारी सहायता की गई । न्यायालयीन लडाई तो ठीक है; परंतु यह सब रोकने के लिए क्या उपाय हैं ?, इसे देखना होगा ।
कठोर कानून आवश्यक !
इसमें केवल जागृति कर यह नहीं रूकेगा; क्योंकि हमारे जागृति की गति प्रति किलोमीटर २०० है, जबकि उनकी गति प्रतिकिलोमीटर १ सहस्र है । उनका समय हमारी अपेक्षा ८०० मीटर से अधिक है । ‘पोर्नाेग्राफी’ के रूप में स्थित यह असुर घर-घर तक पहुंच गया है । हमने संस्कृति का चाहे कितना भी ज्ञान दिया, तब भी स्मार्टफोन पर जब ये वीडियो आते हैं, तो छोटे बच्चों से लेकर वयस्क उन्हें देखते हैं । इसे रोकने हेतु ऐसे वीडियो बनानेवालों पर कार्रवाई हेतु कठोर कानून बनाने की आवश्यकता है, जिसमें ३ वर्षाें तक जमानत न मिल पाए तथा १० वर्ष का कारावास का दंड हो । इस अपराध में आतंकियों पर जो अनुच्छेद लगाए जाते हैं, वही अनुच्छेद इन लोगों पर भी लगाए जाने चाहिएं; क्योंकि पोर्नाेग्राफी एकप्रकार से सांस्कृतिक आतंकवाद ही है । औरंगजेब, मोहम्मद खिलजी आदि आक्रांताओं ने भारत पर आक्रमण कर भारत को जितनी हानि नहीं पहुंचाई, उसके अधिक यह सांस्कृतिक आतंकवाद अधिक संकटकारी है ।
हमारे अनेक संतों ने भविष्यवाणी की है कि भारत एक महान देश बनेगा । इसमें यदि कोई बाधा उत्पन्न कर रहा हो, तो उसे दूर करना हमारा कर्तव्य है । पोर्नाेग्राफी के माध्यम से कोई समाज में अश्लीलता फैला रहा हो, तो उसके विरोध में न्यायालय में अभियोग दर्ज कीजिए । यह लडाई भले ही कठिन लगती हो, तब भी हम जितेंगे तथा इन आसुरी शक्तियों को पराजित करेंगे ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?