आंबा हंगाम का प्रारंभ : गिर्ये-रामेश्वर आम अनुसंधान केंद्र के अधिकारी अवकाश पर !

सिंधुदुर्ग – प्रत्येक वर्ष फलबैना, तुडतुडा जैसे अनेक रोगों के कारण आम की फसल की अत्यधिक हानि होती है । ऐसा होते हुए भी देवगढ तालुक के गिर्ये-रामेश्वर आंबा अनुसंधान केंद्र में आंबा उत्पादन के संबंध में उपयुक्त कोई भी कार्य नहीं हो रहा है । इस केंद्र में कार्य करने वालों को गत १० वर्षों में ५ करोड रुपये से अधिक वेतन दिया गया है । ऐसा होते हुए भी उनके द्वारा कोई अनुसंधान नहीं किया गया है और आम के उत्पादकों को कोई भी लाभ नहीं हो रहा है । इस विषय में गत वर्ष से आवाज उठाने पर भी इस वर्ष ठीक आम की फसल के हंगाम के प्रारंभ होते ही गिर्ये-रामेश्वर आम अनुसंधान केंद्र के अधिकारी ८ दिन से उपस्थित नहीं हैं । अनुसंधान केंद्र से संपर्क करने की कोई भी सुविधा नहीं है । संपर्क करना हो तो अधिकारियों के व्यक्तिगत दूरभाष पर ही करना पडता है — ऐसा अनुचित कार्यपद्धति से कार्य चल रहा है, ऐसा कथन सुराज्य अभियान के समन्वयक डॉ. रविकांत नारकर ने पत्रकार परिषद में किया । उन्होंने यह भी प्रश्न उपस्थित किया कि “अधिकारी मुंबई में बैठकर सिंधुदुर्ग के आम बागान वालों की सहायता कैसे करेंगे ?”

१. यह पत्रकार परिषद सिंधुदुर्गनगरी के पत्रकार भवन में संपन्न हुई । इस पत्रकार परिषद में देवगढ तालुक के आम के व्यापारी श्री दीपक वारिक, श्री विकास दीक्षित, श्री रविंद्र कारेकर, श्री अशोक करंगुटकर, श्री श्रीकृष्ण दुधवडकर, सनातन संस्था के धर्मप्रचारक संत सद्गुरु सत्यवान कदम, हिन्दू विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष अधिवक्ता वीरेंद्र इचलकरंजीकर तथा हिन्दू जनजागरण समिति के श्री राजेंद्र पाटील उपस्थित थे ।
२. इस अवसर पर बोलते हुए श्री दुधवडकर ने कहा कि हमने गिर्ये-रामेश्वर आम अनुसंधान केंद्र के अधिकारी मुंज से संपर्क किया तो उन्होंने कहा, “वर्तमान में मैं मुंबई में हूं तथा केंद्र में कोई भी नहीं है । अतः आम कि फसल के विषय में कोई भी सूचना चाहिए हो तो मेरे लौटने के पश्चात ही मिलेगी ।”
#Konkan |🚨 Mango Crisis in Sindhudurg! 🚨
🅾️Research Officer missing during peak season!
❓How can guidance come from Mumbai?Fruit fly, hopper & major diseases are rising, yet after multiple memorandums Girye–Rameshwar Mango Research Centre remains non-functional. Vague… pic.twitter.com/fHtxmsZrem
— Surajya Abhiyan (@SurajyaCampaign) November 21, 2025
३. इस अवसर पर श्री वारिक ने पूछा कि “फलकिडों पर अब कौन-सा औषधि छिडकना चाहिए ?” तो मुंज ने उत्तर दिया, “सामान्यतः जो औषधियां छिडकी जाती हैं, वही छिडकें ।” वर्तमान में उपलब्ध औषधियों का प्रभाव फलबैना पर नहीं पडता — यह वस्तुस्थिति होते हुए भी तथा इस विषय में पत्राचार होने पर भी ऐसी उत्तर दिए जा रहे हैं, यह गंभीर है । इससे सिंधुदुर्ग की महत्त्वपूर्ण पहचान में से एक, अर्थात आंबा फसल नष्ट हो जाएगी — ऐसा भय वारिक ने व्यक्त किया ।
४. सुराज्य अभियान के श्री खाडिलकर ने कहा, “आंबा फसल पर आने वाले रोग तथा संपूर्ण हंगाम में ली जाने वाली सावधानियों के विषय में एक स्थायी ‘सहायता-क्रमांक’ उपलब्ध होना चाहिए । अधिकारी बदलते ही संपर्क क्रमांक बदलना नहीं चाहिए । इसके साथ ‘कौन-सी औषधियां प्रयोग करनी हैं ? उन्हें कैसे प्रयोग करना है ? तथा उन औषधियों से आम का खेत कैसे तैयार होता है ?’ यह बाग के मालिकों को समझाने के लिए इस अनुसंधान केंद्र के ७३ एकड परिसर में एक नमूना-बाग निर्मित होना समय की आवश्यकता है । इसके लिए आवश्यक होगा तो हम आंदोलन करेंगे ।”
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