कोटि-कोटि प्रणाम !

सनातन के श्रद्धास्रोत प.पू. भक्तराज महाराजजी का १३ नवंबर को महानिर्वाण दिवस

प.पू. भक्तराज महाराजजी

आशा तृष्णा को छोड रे बंदे ।

झूठे सब है जिव के फंदे ।।

श्री गुरु आज्ञा सिर से मान ।

बोल रे हे मुख श्री साईराम ।।

– प.पू. भक्तराज महाराजरचित ‘जबलग घट में है यह प्राण ।’ भजन की पंक्तियां

श्री गुरु की महिमा चाहे कितनी भी गाई जाए, तब भी वह अल्प ही होती है । ‘प.पू. भक्तराज महाराजजी की कृपा सभी पर ऐसी ही अखंडित रहे और वे हमें अध्यात्मप्रसार के कार्य हेतु निरंतर शक्ति प्रदान करें, यह उनके चरणों में भावपूर्ण प्रार्थना करता हूं ।’

– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले