छत्तीसगढ में ईसाई मिशनरियों द्वारा हिन्दुओं के धर्म परिवर्तन की पद्धति में परिवर्तन !

रायपुर (छत्तीसगढ) – छत्तीसगढ के अनेक नगरों एवं ग्रामों में ईसाई मिशनरियों ने धर्म परिवर्तन की पद्धति में परिवर्तन किया है । अब ईसाई महिला प्रचारक अपनी वास्तविक पहचान छिपाकर हिन्दुओं का धर्म परिवर्तन कर रही हैं । वे महिला प्रचारक अस्वस्थ तथा कठिनाइयों में पडी हुई, साथ ही भोलीभाली हिन्दू स्त्रियों से पहले निकटता बढाती हैं, उनका विश्वास अर्जित करती हैं एवं उसके पश्चात उन्हें प्रार्थना सभा में ले जाकर ईसाई पंथ स्वीकार करने के लिए प्रेरित करती हैं ।
१. छत्तीसगढ के कोरबा तथा जांजगीर जनपदों में ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर बडी मात्रा में हिन्दू स्त्रियों तथा कन्याओं को ईसाई पंथ स्वीकार करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है, ऐसा जांच में सामने आया है । धर्म परिवर्तन करनेवाली स्त्रियां तथा कन्याएं अब ‘नन’ नहीं बनतीं, अपितु अपना पूर्व नाम और पहचान बनाए रखकर समाज में गुप्त रूप से ईसाई पंथ का प्रचार कर रही हैं ।
२. इसके लिए ईसाई महिला प्रचारक निर्धन हिन्दू स्त्रियों से निकटता साधती हैं । वे कहती हैं कि उनकी समस्याएं ‘प्रार्थना’ से दूर हो सकती हैं । उन्हें प्रलोभन दिखाया जाता है । तत्पश्चात उन स्त्रियों को चर्च में ले जाकर आवेदनपत्र भरवाए जाते हैं । ‘प्रभु (ईसा) के आशीर्वाद से उनके रोग एवं कठिनाइयां दूर हो जाएंगी’, ऐसा उन्हें आश्वासन दिया जाता है ।
३. रोग एवं कठिनाइयां समाप्त हो जाएंगी, इस आशा से वे पीडित स्त्रियां नियमित रूप से चर्च जाने लगती हैं । वहां औषधोपचार यद्यपि आधुनिक पद्धति से किया जाता है, तथापि उसका श्रेय ‘प्रभु की कृपा’ को दिया जाता है । इनमें से अनुमानतः ९० प्रतिशत हिन्दू स्त्रियां धर्म परिवर्तन करती हैं, जबकि १० प्रतिशत स्त्रियां, कोई लाभ न होने के कारण, धर्म परिवर्तन नहीं करतीं – ऐसा अन्वेषण में प्रकट हुआ है ।
४. ३ से १४ वर्ष की कन्याओं को भी ‘शिक्षा’ के नाम पर चर्च के छात्रावासों में रखा जाता है । वहां उन्हें शिक्षा के साथ-साथ ईसाई पंथ का प्रशिक्षण दिया जाता है ।

५. राज्य के उपमुख्यमंत्री तथा गृहमंत्री विजय शर्मा ने इस धर्म परिवर्तन के विरोध में कठोर कदम उठाने की घोषणा की है । उन्होंने कहा कि ‘प्रार्थना सभा’ के नाम पर लोगों को भ्रमित करनेवाले कार्यक्रमों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है । इन सभाओं पर नियंत्रण रखने के लिए नये विधि में स्वतंत्र प्रावधान किया जाएगा । (धर्म परिवर्तन विरोधी विधि में केवल प्रावधान करके रुकना नहीं चाहिए, अपितु उस विधि को कठोरतापूर्वक लागू करनेवाली प्रभावी यंत्रणा भी आवश्यक है ! – संपादक)
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संपादकीय भूमिका
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