खजुराहो (मध्य प्रदेश) : तोडी हुई श्रीविष्णु की मूर्ति को बदलने की मांग पर सर्वोच्च न्यायालय की याचिकाकर्ता को ‘सलाह’ !

(यह छायाचित्र किसी की धार्मिक भावनाएं आहत करने हेतु नहीं, अपितु वास्तविकता का ध्यान दिलाने के लिए प्रकाशित किया गया है ।)
खजुराहो (मध्यप्रदेश) – यहां के श्री वामन मंदिर में भगवान श्रीविष्णु की ७ फीट ऊंची टूटी हुई मूर्ति को पुनर्स्थापित करने की मांग करनेवाली याचिका सर्वोच्च न्यायालय ने खारीज की है । न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि मूर्ति वर्तमान में जिस स्थिति में है, उसी स्थिति में रहेगी । श्रद्धालुओं को यदि पूजा करनी हो, तो वे दूसरे मंदिर में जा सकते हैं । यह केवल प्रसिद्धि के लिए प्रविष्ट की गई याचिका है । न्यायालय ने याचिकाकर्ता को यह सुझाव भी देते हुए कहा, ‘आप जाईए तथा अब ईश्वर को ही कुछ करने के लिए कहिए । आप स्वयं को भगवान श्रीविष्णु के परमभक्त कहलाते हैं, तो आप उन्हीं से प्रार्थना कीजिए तथा ध्यान कीजिए ।’ मुख्य न्यायाधीश बी.आर्. गवई एवं न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन् की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता राकेश दलाल की याचिका पर विचार करना अस्वीकार किया ।
⚖️🎓 CJI BR Gavai’s remark:
“Ask the deity himself to do something about it.”🛕 Petition seeks replacement of broken Shri Vishnu Vigraha in Khajuraho (MP)
🙏 Govt must honour Hindu sentiments by:
👉 Immersing the broken vigraha respectfully
👉 Installing a new one in its place… pic.twitter.com/xu0CkNzR0F— Sanatan Prabhat (@SanatanPrabhat) September 17, 2025
न्यायालय ने आगे कहा कि यह प्रकरण भारतीय पुरातत्व विभाग की कार्यकक्षा में आता है । यह स्थान एक वैश्विक धरोहर है । यदि आप शैव पंथ के विरोधी नहीं हैं, तो आप वहां जाकर पूजा-अर्चना कर सकते हैं । वहां एक भव्य शिवलिंग है । खजुराहो में स्थित सबसे बडे लिंगों में से वह एक है ।
क्या है यह प्रकरण ?
मुगलों के आक्रमण में श्री वामन मंदिर में स्थित भगवान श्रीविष्णु की मूर्ति तोडी गई थी । तब से लेकर अब तक वह उसी स्थिति में है । मंदिर के गर्भगृह में स्थापित की गई इस भगवान श्रीविष्णु की मूर्ति का सिर तोडा गया है । अनेक सामाजिक संगठन एवं स्थानीय नागरिकों ने इस मूर्ति के जीर्णोद्धार की मांग की है । श्रद्धालुओं के पूजा के अधिकार की रक्षा करने हेतु तथा मंदिर की पवित्रता को पुनर्जीवित करने हेतु याचिकाकर्ता ने सर्वोच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की मांग की थी । याचिकाकर्ता राकेश दलाल ने इस मूर्ति के स्थान पर नई मूर्ति की स्थापना करने की मांग की थी । उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के इस निर्णय पर निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि भाजपा सत्ता में होते हुए भी यह स्थिति बहुत दुखद है । ‘राष्ट्रीय वीर किसान मजदूर संघ दिल्ली’के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश दलाल ने इस मांग को लेकर देहली के जंतरमंतर में विरोध प्रदर्शन भी किया था तथा केंद्रीय गृहमंत्री को ज्ञापन प्रस्तुत किया था । दलाल ने इस मंदिर के बाहर अनेक बार उपवास किया तथा स्थानीय लोगों में जागृति आए; इसके लिए धार्मिक अनुष्ठान भी किए थे । (१८.९.२०२४) |
संपादकीय भूमिकाहिन्दुओं की धर्मभावनाओं को ध्यान में लेकर अब भारत सरकार को ही प्रधानता लेकर भग्न मूर्ति विसर्जित कर उसके स्थान पर नई मूर्ति स्थापित करने के लिए कदम उठाने आवश्यक ! |
(और इनकी सुनिए…) ‘मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं !’नई देहली – भारत के न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई ने खजुराहो (मध्य प्रदेश) के श्री वामन (जवारी) मंदिर की भगवान श्रीविष्णु की मूर्तियों के विषय में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के बाद उन पर आलोचना होने पर स्पष्टीकरण देने का प्रयास किया है । उन्होंने कहा कि मुझे किसी ने बताया कि मेरे कथन का सामाजिक माध्यमों से विपर्यास किया गया है । मैं सभी धर्मों का आदर करता हूं । महाभियोग चलाने की मांगसामाजिक माध्यमों से न्यायमूर्ति गवई के विरोध में #ImpeachCJI (न्यायमूर्ति पर महाभियोग चलाओ) यह हेशटैग ट्रेंड (एक ही विषय पर चर्चा घडवाकर लाना) हुआ, जिसमें गवई के विरोध में महाभियोग की मांग की गई । अधिवक्ता विनीत जिंदाल का राष्ट्रपति को पत्र !अधिवक्ता विनीत जिंदाल ने न्यायमूर्ति गवई को पत्र लिखकर यह कथन वापस लेने की मांग की और कहा कि ‘यह वक्तव्य भगवान विष्णु और सनातन धर्म के विरोध में है ।’ राष्ट्रपति को भी यह पत्र भेजा गया । अधिवक्ता सत्यम सिंह राजपूत ने भी खुला पत्र लिखकर स्पष्टीकरण की मांग की है । (१९.९.२०२४) |

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