
नई देहली – हिमाचल प्रदेश एवं उत्तराखंड जैसे राज्यों में होनेवाली भूस्खलन एवं बाढ की घटनाओं का संज्ञान लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार एवं राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से स्पष्टीकरण मांगा है । सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि अवैधरूप से पेड काटने से यह संकट आया है ।
१. भूस्खलन एवं बाढ के प्रति गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि टिलियों पर स्थित वृक्ष अवैधरूप से काटे जा रहे हैं ।
२. हिमाचल प्रदेश में आई बाढ के पानी से टिलियों से बडे स्तर पर लकडियों के बह जाने की वीडियोज का संदर्भ देते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि यह एक अत्यंत गंभीर समस्या है ।

३. मुख्य न्यायाधीश बी.आर्.गवई एवं न्यायाधीश के. विनोद चंद्रन की खंडपीठ ने केंद्रीय पर्यावरण, मंत्रालय, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण, साथ ही हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू एवं कश्मीर तथा पंजाब इन राज्यों की सरकारों को इस विषय में नोटिस दिए हैं ।
४. खंडपीठ नेअनामिका राणा द्वारा प्रविष्ट की गई याचिका दो सप्ताह उपरांत सुनवाई के लिए सूचीबद्ध की है ,साथ ही सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को सुधारात्मक उपाय सुनिश्चित करने के लिए कहा है ।
संपादकीय भूमिकायह न्यायालय को क्यों बताना पडता है ? सरकारी तंत्र के ध्यान में यह बात क्यों नहीं आती ? |
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