
१. महर्षि नाडीपट्टिकाओं में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का उल्लेख ‘हिन्दू राष्ट्र- स्थापना हेतु अवतरित श्रीविष्णु के अवतार’ तथा सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी एवं सद्गुरु (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी, इन दोनों का उल्लेख ‘श्री महालक्ष्मी का अवतार’ के रूप में किया जाना

‘नाडीपट्टिकाओं में किसी व्यक्ति के जीवन एवं कार्य के विषय में अतीत एवं भविष्यकाल का वर्णन होता है । वर्ष २०१५ से सनातन संस्था के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के विषय में, साथ ही अब तक उनके द्वारा किए हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के कार्य के विषय में तथा साधकों को तैयार कर उनकी आध्यात्मिक उन्नति करवाने के विषय में ३०० से अधिक बार नाडीपट्टिकाओं के वाचन हुए हैं । उन सभी में परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी को ‘अवतारी जीव’ एवं ‘हिन्दू राष्ट्र-स्थापना हेतु अवतरित श्रीविष्णु के अवतार’ कहा गया है । इसके साथ ही वर्ष २०१५ से ही नाडीपट्टिकाओं में उस समय सद्गुरुपद पर विराजमान श्रीमती बिंदा नीलेश सिंगबाळजी एवं श्रीमती अंजली मुकुल गाडगीळजी का भी ‘अवतारी जीव’ के रूप में उल्लेख आ रहा है, साथ ही परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी के हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के कार्य में इन दोनों के सहभाग के विषय में भी बताया जा रहा है । नाडीपट्टिका लिखनेवाले महर्षि इन दोनों का उल्लेख, ‘श्री महालक्ष्मी की अवतार’ के रूप में कर रहे हैं । महर्षियों ने श्रीमती सिंगबाळजी एवं श्रीमती गाडगीळजी को ‘परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी की उत्तराधिकारिणियां’ घोषित कर सम्मानित किया है । महर्षियों ने जैसे परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी का उल्लेख ‘सच्चिदानंद परब्रह्म’, ऐसा करने के लिए कहा है; वैसे ही श्रीमती सिंगबाळजी का उल्लेख ‘श्रीसत्शक्ति’ के रूप में तथा श्रीमती गाडगीळजी का उल्लेख ‘श्रीचित्शक्ति’, ऐसा करने के लिए कहा । इससे महर्षियों ने सनातन संस्था के इन तीनों गुरुओं की महानता के विषय में बताया है ।
२. सनातन के साधक सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के प्रचुर कार्य के माध्यम से उनका अवतारत्व अनुभव कर रहे हैं
सनातन के साधक विगत ३० वर्षों से सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी का विशाल कार्य देख रहे हैं । सनातन संस्था की स्थापना, उसके माध्यम से पूरे भारत में पहुंचा अध्यात्मप्रसार का कार्य, अध्यात्मप्रसार के कारण साधकों का तैयार होने, सहस्रों साधकों की उन्नति होने तथा १३० से अधिक साधकों के संत पद पर विराजमान होने के माध्यम से साधकों का साधना में आगे बढना, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना हेतु साधकों का हो रहा दिशादर्शन, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य को समाज में मिल रही मान्यता इत्यादि सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की अनेक उपलब्धियां केवल साधक ही नहीं, अपितु समाज के महनीय व्यक्ति भी अचंभित होकर देख रहे हैं । ३० वर्षों की अल्पावधि में इतना विशाल कार्य केवल अवतारी व्यक्ति ही कर सकते हैं !
आंतरिक सान्निध्य में निरंतर रहनेवालीं श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी !

श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने उनमें विद्यमान भाव का रूपांतरण भक्ति में किया है । भक्ति का अर्थ है गुरुचरणों में संपूर्ण शरणागति ! उन्होंने साधकों को भी सिखाया है कि भक्ति कैसे करनी चाहिए । समष्टि सेवाएं करते समय भी वे निरंतर आंतरिक सान्निध्य में होती हैं । श्रीसत्शक्ति(श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी द्वारा लिए जानेवाले साप्ताहिक भक्तिसत्संगों में प्रत्येक साधक को उनकी वाणी से व्यक्त होनेवाली उत्कटता अनुभव होती है ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?