Rajasthan Anti-Conversion Bill : राजस्थान सरकार धर्मांतरणविरोधी कानून को और कठोर बनाएगी !

  • आजीवन कारावास का भी है प्रावधान !

  • कोई संस्था धर्मांतरण के कार्य में संलिप्त होने का सिद्ध हुआ, तो लगेगा प्रतिबंध !

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा

जयपूर – धर्मांतरण रोकने हेतु भाजपशासित राजस्थान सरकार ने नए सिरे से और कठोर धर्मांतरणविरोधी कानून बनाने का निर्णय लिया है । कुछ ही दिन पूर्व मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में हुई मंत्रीपरिषद की बैठक में ‘राजस्थान गैरकानूनी धर्मांतरण प्रतिबंध विधेयक २०२५’का मसौदा पारित किया गया । १ सितंबर से आरंभ हो रहे विधानसभा सत्र में यह विधेयक रखा जाएगा । फरवरी २०२५ में बनाए गए इस कानून के मसौदे में अधिक से अधिक १० वर्ष के कारावास का प्रावधान था, जिसे अब आजीवन कारावास तक बढाया गया है ।

कठोर धर्मांतरविरोधी विधेयक में समाहित महत्त्वपूर्ण प्रावधान !

१. झूठा कारण देकर किसी का भी धर्मांतरण नहीं हो पाएगा !

कोई भी व्यक्ति अथवा संस्था द्रोह कर, लालच देकर, बलपूर्वक, झूठी जानकारी अथवा विवाह का झूठा आश्वासन देकर किसी का भी धर्मांतरण नहीं कर पाएगा ।

२. लालच देकर अथवा दबाव बनाकर किया गया धर्मांतरण सिद्ध हुआ, तो उसके लिए क्या दंड होगा

उक्त पद्धति से धर्मांतरण किए जाने पर न्यूनतम ७ वर्ष से अधिक से लेकर अधिक से अधिक १४ वर्ष के कारावास का दंड मिलेगा, साथ ही ५ लाख रुपए तक का आर्थिक दंड भी हो सकता है; परंतु मूल धर्म में वापस आने के संदर्भ में यह कानून लागू नहीं होगा । यदि धर्मांतरण के उद्देश्य से विवाह किया गया हो, तो पारिवारिक न्यायालय इस विवाह को अवैध घोषित कर सकता है ।

३. सामूहिक धर्मांतरण के लिए और कठोर दंड का प्रावधान !

सामूहिक धर्मांतरण की घटनाओं के लिए और कठोर दंड का प्रावधान है । इसमें दोषी पाए जानेवाले को न्यूनतम २० वर्ष से लेकर आजीवन कारावास तक के दंड का प्रावधान है, साथ ही न्यूनत २५ लाख रुपए तक का आर्थिक दंड सुनाया जाएगा ।

४. विदेशों से मिले पैसों से धर्मांतरण किया गया, तो दंड बढाया जाएगा !

धर्मांतरण के लिए विदेशों से अथवा अवैध संस्थाओं से पैसे लेने की बात सिद्ध हुई, तो इस अपराध के लिए न्यूनतम १० वर्ष से लेकर अधिक से अधिक २० वर्ष का दंड दिया जाएगा, साथ ही न्यूनतम २० लाख रुपए का आर्थिक दंड दिया जाएगा ।

५. महिलों से देहव्यापार करवाने पर अधिक दंड का प्रावधान !

भय दिखाकर, बलपूर्वक अथवा विवाह का वचन देकर उसका पालन न करना अथवा महिलाओं का देहव्यापार कराने के अपराधों के लिए और कठोर दंड के प्रावधान किए गए हैं । इसके लिए २० वर्ष से लेकर आजीवन कारावास, साथ ही न्यूनतम ३० लाख रुपए के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है । यह अपराध बार-बार किया जाता है, तो इस नए कानून में इसके लिए आजीवन कारावास से लेकर न्यूनतम ५० लाख रुपए के आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है ।

६. आरोपी को ही उसके निर्दाेष होने के प्रमाण देने पडेंगे !

इसमें विशेष बात यह है कि जिस व्यक्ति पर धर्मांतरण करने का आरोप लगा है, उसे उसके ‘निर्दाेष’ होने के प्रमाण देने पडेंगे ।’

जिस स्थान पर धर्मांतरण किया जाता है, उस वास्तु पर चलाया जाएगा बुलडोजर !

अवैध धर्मांतरण की प्रक्रिया में संलिप्त संस्था का पंजीकरण निरस्त किया जाएगा अर्थात ही उस पर प्रतिबंध लगाया जाएगा । ऐसी संस्था को मिल रहा सरकारी अनुदान भी बंद किया जाएगा । जिस वास्तु में धर्मांतरण किया गया है, उसकी जांच कर उसे नियंत्रण में लिया जाएगा अथवा उसे बुलडोजर चलाकर ध्वस्त किया जाएगा ।

इस बैठक में और एक महत्त्वपूर्ण निर्णय लिया गया है । उसके अनुसार राज्य के ३१२ निवासव बस्तियों में अब १ लाख के स्थान पर २ लाख पथदीप लगाए जानेवाले हैं । पुराने पथदीपों को हटाकर नए दीप लगाने हेतु सरकार की ओर से लगभग १६० करोड रुपए खर्च किए जाएंगे ।

संपादकीय भूमिका

  • सभी भाजपाशासित राज्यों ने ऐसा कानून बनाकर उसका कठोरता से कार्यान्वयन करना अपेक्षित है !
  • धर्मांतरणबंदी हेतु इतना कठोर कानून बनानेवाला राज्यस्थान कदाचित पहला ही राज्य होगा; परंतु इस कानून का प्रत्यक्षरूप से कितना लाभ होगा, यह शोध का विषय है; क्योंकि इसका कारण यह है कि स्वयं राजस्थान, साथ ही उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश एवं गुजरात में धर्मांतरणबंदी कानून होते हुए भी वहां लव जिहाद के तथा धर्मांतरण की अनेक घटनाएं सामने आ रही हैं । इसे देखते हुए किस पीडितों ने ‘इसके लिए दोषियों को फांसी पर लटका दीजिए’, ऐसी मांग की; तो क्या उसे अनुचित अथवा आततायिता कहा जा सकेगा ?