
परिवार में जिस व्यक्ति के पिता अथवा माता की मृत्यु हो गई हो, उस श्राद्धकर्ता को माता अथवा पिता के लिए उनके देहान्त के दिन से आगे एक वर्ष तक महालय श्राद्ध करने की आवश्यकता नहीं होती; क्योंकि उनके लिए वर्षभर में श्राद्धकर्म किया ही जाता है । श्राद्धकर्ता पुत्र के अतिरिक्त अन्यों को, उदा. श्राद्धकर्ता के चचेरे भाई एवं जिन्हें सूतक लगता है, ऐसे लोगों को अपने पिता इत्यादि अन्य सदस्यों के लिए प्रतिवर्ष की भांति महालय श्राद्ध करना चाहिए । किन्तु, सूतक के दिनों में महालय पक्ष पडने पर श्राद्ध न करें । सूतक समाप्त होने पर आनेवाली अमावस्या पर श्राद्ध करें ।
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