निरंतर गुरुसेवा का ध्यास होनेवाली रत्नागिरी की श्रीमती अंजली हनुमंत करंबेळकर सनातन की १३३वें (समष्टि) संतपद पर विराजमान

पू. (श्रीमती) अंजली हनुमंत करंबेळकरजी

रत्नागिरी (महाराष्ट्र) – १० अगस्त को सनातन की धर्मप्रचारक सद्गुरु स्वाती खाडयेजी ने यहां की सनातन की साधिका श्रीमती अंजली हनुमंत करंबेळकर (आयु ६८ वर्ष) के १३३वें (समष्टि) संतपद पर विराजमान होने का शुभ समाचार दिया । एक अनौपचारिक समारोह में यह घोषणा की गई । इस अवसर पर सनातन के धर्मप्रचारक सद्गुरु सत्यवान कदमजी, करंबेळकर परिवार के सदस्य एवं सनातन के साधक उपस्थित थे । इस समय सद्गुरु स्वाती खाडये ने पू. (श्रीमती) अंजली करंबेळकर के विषय में सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने दिया हुआ संदेश साधकों को पढकर सुनाया ।

सनातन के १ लाख ग्रंथ वितरित करने का लिया हुआ उच्चतम ध्येय ! 

सेवा करते समय मुझे हमेशा प.पू. गुरुमाऊली के ग्रंथसंपदा के माध्यम से उपलब्ध हुई ज्ञानगंगा सभी तक पहुंचाना चाहिए, इसकी तीव्र तडप , ध्यास लगने लगा । विविध सेवा करते समय अभी तक सनातन के ८० सहस्र ग्रंथों का वितरण गुरुमाऊली ने मेरे माध्यम से किया । ‘१ लाख ग्रंथ वितरण करने का यह ध्येय मैंने निश्चित किया है एवं वे भी ध्येय गुरुकृपा से पूर्ण होगा’, ऐसी मेरी श्रद्धा है । पू. (श्रीमती) करंबेळकरकाकू ने बडे बिमारी में भी समाज तक ग्रंथ पहुंचाने हेतु विविध माध्यम से विशेषतापूर्ण प्रयत्न किये है ।