B.K. Hariprasad : (और इनकी सुनिए… ) ‘रा.स्व. संघ ‘भारतीय तालिबान’ है !’

वरिष्ठ कांग्रेस नेता बी.के. हरिप्रसाद का विषवमन !

बी.के. हरिप्रसाद

नई दिल्ली – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ देश की शांति भंग करने का प्रयत्न कर रहा है । मैं संघ की तुलना केवल ‘तालिबान’ से करूंगा । वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं पूर्व सांसद बी.के. हरिप्रसाद ने कहा कि संघ ‘भारतीय तालिबान’ है एवं प्रधानमंत्री लाल किले से संघ की प्रशंसा कर रहे हैं । लाल किले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में, प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के १०० वर्ष पूर्ण‘ करने के अवसर पर शुभकामनाएं दी थी । इसी पर हरिप्रसाद ने उपरोक्त आलोचना की ।

संघ का स्वतंत्रता संग्राम में कोई योगदान नहीं है ! – हरिप्रसाद

१. क्या कोई ‘संघीय’ (संघ का ) था जिसने स्वतंत्रता संग्राम में सहभाग लिया था ? संघ एक पंजीकृत संगठन नहीं है, यह लज्जास्पद है । हमें ज्ञात नहीं कि उन्हें धन कहां से मिलता है । भा.ज.पा. एवं संघ इतिहास को विकृत करने में तज्ञ हैं । (भा.ज.पा. एवं आर.एस.एस. ने नहीं, अपितु कांग्रेस ने इतिहास को विकृत किया है एवं अब उसमें वास्तविकता के आधार पर संशोधन किया जा रहा है! – संपादक) वे इतिहास को पुन:से लिखने का प्रयत्न कर रहे हैं ।

बी.के. हरिप्रसाद

२. स्वतंत्रता से पूर्व बंगाल के प्रधानमंत्री ए.के. फजलुल हक एवं आर.एस.एस. विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सर्वप्रथम बंगाल विभाजन का प्रस्ताव रखा था । मोहम्मद अली जिन्ना एवं सावरकर का मानना था कि दोनों धर्मों के आधार पर अलग राज्य आवश्यक है । (‘मिथ्या बोलो, पर शीघ्र बोलो’ वाली मानसिकता वाले कांग्रेसी ! संपूर्ण विश्व को ज्ञात है कि विभाजन के अपराधी कौन हैं । कांग्रेसी चाहे जितना भी मिथ्या प्रचार करने का प्रयत्न करें, उन्हें इससे कोई लाभ नहीं होगा ! – संपादक) यद्यपि अब भा.ज.पा. वाले इसके लिए कांग्रेस को उत्तरदायी ठहरा रहे हैं ।

कांग्रेस की ‘तालिबान’ मानसिकता ! – भाजपा

भा.ज.पा. प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने बी.के. हरिप्रसाद को उत्तर देते हुए कहा, ‘कांग्रेस की ही ‘तालिबान’ मानसिकता है । महात्मा गांधी और जयप्रकाश नारायण ने आर.एस.एस. की प्रशंसा क्यों की ? उन्होंने पूछा, ‘पूर्व राष्ट्रपति दिवंगत प्रणब मुखर्जी आर.एस.एस. मुख्यालय क्यों गए ?’

संपादकीय भूमिका

  • यदि रा.स्व. संघ ‘तालिबान’ होता, तो क्या इस देश में एक भी हिन्दू-विरोधी एवं अन्य धर्मों का व्यक्ति जीवित होता ? क्या बी.के. हरिप्रसाद ऐसी आलोचना कर पाते ?
  • क्या बी.के. हरिप्रसाद अफगानिस्तान के तालिबानी शासन में एक ‘हिन्दू’ के रूप में रह सकते हैं ? उन्हें प्रथम यह बताना चाहिए !