श्रीचित्शक्ति् (श्रीमती) अंजली गाडगीळजी का भारतभ्रमण

तिरुवल्ली (तमिलनाडु) : यहां के तिरुत्तणि गांव में स्थित सुब्रमण्य स्वामी मंदिर में जीवनाडी-पट्टीका वाचक पू. डॉ. ॐ उलगनाथनजी एवं सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारी श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी ने ३० जुलाई को दर्शन किए ।

इस अवसर पर भगवान कार्तिकेय का पूजन किया गया । इसके साथ ही श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) गाडगीळजी ने ‘सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी को उत्तम स्वास्थ्य, आगामी आपातकाल में साधकों की रक्षा हो तथा शीघ्रातिशीघ्र हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के लिए प्रार्थना की ।

तिरुत्तणि कार्तिकेय मंदिर की स्थान-महिमा
तारकासुर के संहार के उपरांत शिव-पार्वती की आज्ञा से कार्तिकेय दक्षिण में आते हैं । कार्तिकेय तारकासुर के बडे भाई असुर सूरपद्म का तमिलनाडु के तिरुचेंदूर नामक समुद्र तट पर संहार करते हैं । आक्रोश की अवस्था में कार्तिकेय विश्राम के लिए जिस पर्वत पर आते हैं, वह है तिरुत्तणि पर्वत । कार्तिकेय इस पर्वत पर आकर शांत हो जाते हैं । ‘तिरु’ का अर्थ है श्री एवं ‘तणि’ का अर्थ है शांत होना । कार्तिकेय ने इसी पर्वत पर अगस्त्य ऋषि को तमिल भाषा सिखाई थी ।

कार्तिकेय की दो पत्नियां हैं – देवसेना एवं वल्ली । तारकासुर के संहार से संतुष्ट होकर इंद्र ने अपनी बेटी देवसेना कार्तिकेय को दी तथा उनका विवाह कैलाश में हुआ । सूरपद्म असुर के संहार के उपरांत कार्तिकेय तिरुत्तणि आए । यहां उन्होंने भक्त वल्ली नामक भील लडकी से विवाह किया । तमिलनाडु में इस दिव्य विवाह को ‘जीव और शिव का मिलन’ माना जाता है । तिरुत्तणि कार्तिकेय मंदिर में वल्ली एवं कार्तिकेय का विवाह बडे उत्साह से मनाया जाता है ।
तिरुत्तणि कार्तिकेय मंदिर कांचीपुरम से ४५ किलोमीटर तथा चेन्नई से ८० किलोमीटर दूर है । यहां से तिरुपति ६० किलोमीटर की दूरी पर है । एक छोटी सी पहाडी पर स्थित इस मंदिर तक जाने के लिए ३६५ सीढियां हैं, जो ३६५ दिनों का प्रतीक हैं । कार्तिकेय के भक्त कांवड लेकर इन ३६५ सीढियों को चढकर भगवान के पास जाते हैं ।
कार्तिकेय के कुल ६ महत्त्वपूर्ण स्थान हैं । विशेष बात यह है कि ये ६ स्थान दक्षिण भारत के तमिलनाडु राज्य में हैं । कार्तिकेय तमिलनाडु के इष्टदेव हैं । इन ६ प्रमुख कार्तिकेय स्थानों में से तिरुत्तणि ५ वां प्रमुख स्थान है ।
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