Padmagandhi Movie : ‘पद्मगन्धि’ नामक दैवीय फूल कमल पर आधारित फिल्म बहुत शीघ्र होगी प्रदर्शित !

  • संस्कृत, हिन्दी एवं कन्नड इन ३ भाषाओं में होगा फिल्म का प्रदर्शन

  • प्रसिद्ध संस्कृत विदुषी, प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा पूर्व सांसद डॉ. एस्.आर्. लीला का लेखन एवं निर्मिति !

  • प्रसिद्ध निर्देशक एवं संस्कृत विद्वान श्री. के. सुचेंद्र प्रसाद के साथ ‘सनातन प्रभात’ने किया संवाद !

‘पुद्मगन्धि’ फिल्म का संस्कृत भाषा का भितीपत्रक और ‘पुद्मगन्धि’ फिल्म का कन्नड भाषा का भितीपत्रक भित्तीपत्रक

बंगलुरू (कर्नाटक) : कमल एक दैवीय फूल है तथा वह भारत का केवल राष्ट्रीय फूल ही नहीं, अपितु हिन्दू संस्कृति का अमूल्य प्रतीक है । केवल इतना ही नहीं, अपितु वह समस्त मानवजाति के लिए अत्यंत हितकारी है, ऐसा प्रतिपादन कर्नाटक के प्रसिद्ध अभिनेता, निर्देशक तथा संस्कृत विद्वान श्री. सुचेंद्र प्रसाद ने ‘सनातन प्रभात’से बात करते हुए किया । उन्होंने ‘पद्मगन्धि’ नामक कमल की अलौकितता विशद करनेवाली फिल्म का निर्देशन किया है । इस फिल्म का लेखन तथा निर्मिति प्रसिद्ध संस्कृत विदुषी, प्रखर हिन्दुत्वनिष्ठ तथा कर्नाटक विधान परिषद की पूर्व विधायिका डॉ. एस्.आर्. लीला ने किया है ।

हमारे प्राचीन विज्ञान तथा धर्मग्रंथ को हम भूल रहे हैं, इस स्थिति को इस फिल्म से दिखाने का प्रयास ! – निर्देशक सुचेंद्र प्रसाद

निर्देशक सुचेंद्र प्रसाद

‘पद्मगन्धि’ फिल्म के विषय में प्रसाद द्वारा रखे गए निम्न १० महत्त्वपूर्ण सूत्र !

१. कमल कीचड में उगकर भी पवित्र होता है । वेद विशेषकर श्रीसूक्त में उसका उल्लेख मिलता है, साथ ही भारतीय साहित्य, दर्शनशास्त्र, पुराण, रंगमंच, कला, मंदिर की वास्तुकलाओं आदि में भी उसकी जानकारी देखने को मिलती है ।

२. वर्ष १८५७ के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में लडे गए युद्ध में स्वतंत्रता सेनानी तात्या टोपे ने ही ब्रिटिश सेना में काम करनेवाले भारतीय सैनिकों को कमल का ही फूल देकर उनके भारत में पक्ष में होने की आश्वस्तता करने हेतु संकेतात्मक योजना बनाई थी ।

३. कमल हमारा राष्ट्रीय फूल है तथा हमारे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्मविभूषण, पद्मभूषण एवं पद्मश्री इन नामों में भी उसका उल्लेख है । अभिनय के लिए भी ‘स्वर्णकमल’ के नाम से पुरस्कार दिए जाते हैं ।

४. ‘अमरकोश’ नाम के हमारे प्राचीन ग्रंथ में भी ३६ सहस्र बार भिन्न-भिन्न शब्दों का उपयोग कर किया गया कमल का उल्लेख मिलता है । वनस्पतिशास्त्र में भी कमल का अनन्यसाधारण महत्त्व है ।

५. इस फिल्म से कमल की ये सभी अद्वितीय विशेषताएं बताई गई हैं । हम अपने प्राचीन विज्ञान तथा धर्मग्रंथों को भूलते जा रहे हैं तथा इसी विषय को हमने इस फिल्म के सामने समाज के सामने रखने का हमने प्रयास किया है ।

६. इस फिल्म की कहानी गुरुकुल में शिक्षा ग्रहण कर रही एक लडकी पर आधारित है । इस फिल्म की कहानी हिन्दू धर्मग्रंथों, इतिहास, युद्ध आदि सूत्रों को स्पर्श करती है ।

७. इस फिल्म के द्वारा हमने वेद एवं पुराणों का सारगर्भबताने का प्रयास किया है । इसमें वराहमिहीर, पाणिनी, चरक आदि महान ऋषि-मुनियों को भी चित्रित किया गया है ।

८. इसमें विशेष बात यह है कि इस फिल्म में मुख्य भूमिका निभा रही छोटी लडकी का नाम ‘महापद्मा’ है तथा फिल्म में भी उसे वही नाम दिया गया है ।

९. डॉ. एस्.आर्. लीला से बात करते समय हमें कमल पर केवल एक पुस्तक अथवा छोटी फिल्म (डॉक्युमेंटरी) करनी चाहिए, ऐसा मुझे लगा था; परंतु जब हम इस विषय पर शोध करते गए, वैसे यह ध्यान में आया कि यह विषय इतना महत्त्वपूर्ण है कि उसे सभी तक पहुंचाने हेतु फिल्म ही बनानी पडेगी ।

१०. इस फिल्म के विषय पर बातचीत, शोध तथा लेखन करने में २ वर्ष लगे तथा उसके उपरांत ४ वर्ष चित्रीकरण तथा अन्य कामों के लिए देने पडे । इस फिल्म को सभी के लिए प्रदर्शित करने से पूर्व हम इस फिल्म को ‘इंडियन पैनोरमा इंटरनैशनल फिल्म फेस्टिवल’ में प्रदर्शित करेंगे ।

छोटे बच्चों, साथ ही वयस्कों के लिए भी अत्यंत उपयुक्त फिल्म ! – निर्देशक प्रसाद

के. सुचेंद्र प्रसाद ने ‘सनातन प्रभात’से बात करते हुए कहा कि ‘पुष्पगन्धि’ फिल्म सिद्धांतों की दृष्टि से बनाई गई फिल्म है, ऐसा लग सकता है; परंतु मूलतः वह जैसे छोटे बच्चों के लिए उपयुक्त है, वैसे ही वयस्कों को भी भानेवाला है । कुछ दिन पूर्व बंगलुरु में हुए इस फिल्म के एक शो में कुछ विश्वविख्यात विचारक उपस्थित थे । यह फिल्म देखकर सभी अपने भावाश्रु रोक नहीं पाए ।

डॉ. एस्.आर्. लीला ने अपने जीवन की सब पूंजी इस फिल्म की निर्मिति में लगा दी !

डॉ. एस्.आर्. लीला

‘पुष्पगन्धि’ फिल्म की निर्मिति के लिए डॉ. एस्.आर्. लीला ने अपने जीवन की सब पूंजी लगाई है । इससे धर्म के प्रति उनकी लगन ध्यान में आती है । ‘सनातन प्रभात’के साथ बात करते हुए उन्होंने कहा कि इस फिल्म से कमल का आध्यात्मिक महत्त्व विश्व के सामने लाने का हमारा प्रयास है । यह फिल्म अधिक से अधिक लोगों को देखनी चाहिए ।

प्रत्येक भारतीय को यह फिल्म देखनी ही चाहिए ! – मोहन गौडा, हिन्दू जनजागृति समिति

हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा

‘पुष्पगन्धि’ फिल्म देखकर हिन्दू जनजागृति समिति के कर्नाटक राज्य प्रवक्ता श्री. मोहन गौडा ने कहा कि यह फिल्म कमल के गहन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्त्व पर सुंदरता से प्रकाश डालता है । कमल भारत का केवल राष्ट्रीय फूल ही नहीं है, अपितु यह फिल्म देखने के उपरांत यह स्पष्ट होता है कि वह भारतीय संस्कृति का एक दैवी प्रतीक है । वह हमारी परंपराओं, हमारी परिष्कृत संस्कृति का तथा हमारी गौरवशाली धरोहर का प्रतिनिधित्व करता है । वह हमारे अभिमान का सच्चा प्रतिबिंब है । ‘पुष्पगन्धि’ फिल्म कमल का आध्यात्मिक महत्त्व, उसका औषधीय मूल्य तथा शास्त्रीय वैभव इतनी गहनता से व्यक्त करता है कि उससे मन में कमल के प्रति सम्मान की गहन भावना जागृत होती है । प्रत्येक भारतीय को यह फिल्म देखनी ही चाहिए ।

श्री. गौडा आगे कहते हैं कि इस फिल्म से गुरुकुल की छात्राओं के जीवन से कमल का नैसर्गिक महत्त्व चित्रित किया गया है । इसमें किसी प्रकार की आततायिता अथवा कृत्रिमता नहीं है, केवल गुरुकुल जीवन का एक प्रामाणिक चित्रण है, जो ऐसे छात्रों के लिए गर्व एवं सममान जागृत करता है । वर्तमान आधुनिक विश्व में जहां अधिकांश बच्चे पाश्चात्त्य पद्धति की शिक्षा ग्रहण करते हैं तथा जो अपना मूल भूल चुके हैं तथा जिसके कारण परिवार एवं समाज इन दोनों के सामने चुनौतियां उत्पन्न होती हैं । यह फिल्म देखकर अपने बच्चों को भी पारंपरिक भारतीय गुरुकुल पद्धति के अनुसार शिक्षा देनी चाहिए, यह तीव्र इच्छा भी जागृत होगी । मैं गुरुदेवजी के चरणों में यह प्रार्थना करता हूं कि इस फिल्म को राष्ट्रीय पहचान मिले, अनेक पुरस्कार मिले तथा यह फिल्म पूरे देश के लाखों हिन्दुओं तक पहुंचे !