
नई देहली – ‘‘भारत का विकास होना चाहिए; परंतु वह मानवजाति के हित में होना चाहिए । भारत के विकास में ‘भारतीयत्व सर्वोपरि’ होना चाहिए । जीविका जीवन के लिए चाहिए; परंतु जीवन जीविका न बने, इस बात को सभी को ध्यान में रखना चाहिए । केवल पेट एवं परिवार तक सीमित न रहें, अपितु देश का विकास, धर्म एवं अध्यात्म की उन्नति में योगदान दें ।’’, ऐसा मार्गदर्शन पुरी पीठ के श्रीमद् जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी निश्चलानंद सरस्वतीजी ने किया । कुछ दिन पूर्व यहां उनका ८३वां जयंती महोत्सव मनाया गया, उस उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम में मार्गदर्शन करते हुए वे ऐसा बोल रहे थे ।

शंकराचार्यजी की मंगलमय उपस्थिति में ‘राष्ट्रोत्कर्ष दिवस’ का आयोजन किया गया था । इस अवसर पर देहली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान, भाजपा सांसद संबित पात्रा, पूर्व सांसद डॉ. सुब्रमण्यम् स्वामी, प्रसिद्ध कथावाचक देवकीनंदन ठाकुर आदि उपस्थित थे ।
शंकराचार्यजी ने आगे कहा कि किस भी समाज के विकास के लिए संपूर्णतया सरकार पर निर्भर रहना उचित नहीं है । यदि सनातन धर्म टिका रहा, तो मनुष्य का कल्याण होगा, विश्व में शांति आएगी तथा भारत पुनः विश्व नेता बनेगा । भारत में निष्पक्ष सनातन धर्म व्यवस्था कैसे स्थापित की जाए ?, इस विषय में समाज में जागृति लानी होगी ।
हिन्दू जनजागृति समिति के सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी को भी किया गया सम्मानित !

इस कार्यक्रम में हिन्दू जनजागृति समिति के राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी भी सहभागी थे । पीठ परिषद के हरियाणा समन्वयक तथा कार्यक्रम के सह-कार्यक्रम समन्वयक प्रवीण गुप्ता ने सद्गुरु डॉ. पिंगळेजी को स्मृतिचिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया ।
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