मुसलमानों ने चगणाधीश्वर कोलशांतेश्वर मठ के स्वामीजी को कुरान ग्रंथ भेंट कर दी नवसंवत्सर की शुभकामनाएं !’ इस अवसर पर मंगळूरु के मौलाना मकसून उमरी ने कहा, ‘‘कुरान ग्रंथ मनुष्य को जीवन कैसे जीना चाहिए ?, इसका मार्गदर्शन करता है । कोई भी बडा अथवा छोटा नहीं है ।’’ यह समाचार पढकर ‘सनातन प्रभात’ में धर्मांध मुसलमानों के कुकर्माें के विषय में जो समाचार प्रकाशित होते हैं, वो सभी समाचार मेरी आंखों के सामने आ गए तथा मेरा मन निम्न विचारप्रक्रिया से निराश हुआ । धर्मांधों के ऐसे कुछ दुष्कृत्य यहां दिए गए हैं ।

धर्मांध मुसलमानों द्वारा होनेवाले दुष्कृत्य

मुसलमानों का राजा औरंगजेब ने अपने सगे भाई को मारकर पिता को कारागृह में डालकर सत्ता हासिल की थी । उसी ने निर्दाेष लोगों पर अत्याचार करना, मंदिरों में मूर्तियों की तोडफोड करना, जनता पर विभिन्न कर लगाकर उसे लूटना आदि अनेक दुष्कृत्य किए । इस प्रकार धर्मांध झूठ-धोखाधडी करना, डाके डालना, चोरी करना, अन्य धर्मियों की महिलाओं का अपहरण कर उन पर अत्याचार कर उन्हें क्रूरतापूर्वक मार डालना (८६ टुकडे कर हत्या करना) अथवा उन्हें विदेशों में बेचना, छोटे बच्चों का अपहरण कर उन्हें विकलांग बनाकर उन्हें भीख मांगने के लिए बाध्य करना, उनके बल पर पैसा कमाना, अन्य धर्मियों की विवाह की शोभायात्राओं पर अथवा मोर्चाें पर सशस्त्र आक्रमण करना, ‘सर तन से जुदा’ (शिरच्छेद) करना, भीड का अनुचित लाभ उठाकर महिला पुलिसकर्मियों के कपडे फाडकर उनके साथ अभद्र व्यवहार करना, बमविस्फोट करना, वाहन चुराकर उन्हें बेचना, हिंसा में अग्रणी होना, दहशत फैलाकर फिरौती वसूलना, गढ-किलों की शिलाओं पर हरा रंग लगाकर वहां दरगाह बनाना, मूर्तियों की तोडफोड करना, हथियार लेकर हिन्दुओं के घर में घुसकर उनसे मारपीट कर उन्हें लूटना, सोना, अफीम, रेत जैसे अवैध वस्तुओं की तस्करी करना, भूमि हडप लेना, अपनी दुकानों पर ‘हिन्दू’ नाम के फलक लगाकर माल बेचना, झूठा नाम, जाति, धर्म इत्यादि झूठ बोलकर गैरमुसलमान युवतियों को प्रेमजाल में फंसाकर अंततः उनकी हत्या करना, उनके अश्लील छायाचित्र खींचकर अथवा वीडियो बनाकर उनका अनुचित लाभ उठाना, ३-४ विवाह कर अनेक बच्चों को जन्म देकर अपने धर्मियों की जनसंख्या बढाना, हिन्दुओं की २-३ वर्ष की बालिकाओं पर अत्याचार करना, गोवंश पर अत्याचार कर उन्हें क्रूरतापूर्ण पद्धति से काटना, पुलिस थानों में आग लगाना, ड्यूटी निभाने गए पुलिसकर्मियों को चूने की भट्टी में डाल देना अथवा उन्हें जलाकर मारना, यात्रा में रेल के खाली डिब्बे में यदि अन्य धर्मी महिला अकेली हो, तो उस पर अत्याचार कर अंततः उसकी हत्या कर उसे चलती गाडी से बाहर फेंक देना; फूल, फल, साथ ही ढाबे पर खाद्यपदार्थाें को थूक लगाकर उन्हें बेचना, रसोईघर के पदार्थाें में मूत्र मिलाना, अमावस्या की रात को विशेषकर हिन्दू युवतियों पर अघोरी प्रयोग कर उनकी शारीरिक एवं आर्थिक लूट करना, अरब देशों से मिलनेवाली आर्थिक सहायता के बल पर भारतीय हिन्दू बस्ती में अधिक पैसे देकर भूमि खरीदना अथवा स्थानीय लोगों पर दादागिरी दिखाकर उन्हें वहां से खदेड देना इत्यादि दुष्कर्म करते
हुए दिखाई देते हैं ।
मौलाना उमरी सहित अन्य मौलानाओं को भी इस पर चिंतन करने की आवश्यकता !
कुरान ग्रंथ यदि ‘मनुष्य को जीवन कैसे जीना चाहिए ?’, इसका मार्गदर्शन करता है, तो इस लेख में किए गए उल्लेख के अनुसार धर्मांध मुसलमान जो अनुचित तथा आपराधिक कृत्य करते हैं, उन्हें कुरान पढना चाहिए, अन्यथा मौलाना मकसून उमरी का ‘कुरान ग्रंथ मनुष्य को जीवन कैसे जीना चाहिए ?’, इसका मार्गदर्शन करता है’, यह वाक्य व्यंग अथवा विरोधाभास सिद्ध होगा । उसी प्रकार मौलाना उमरी सहित अन्य मौलानाअों को भी इस पर चिंतन करना आवश्यक हो जाता है ।’
– (पू.) गुरुनाथ दाभोलकर (आयु ८५ वर्ष), सनातन आश्रम, देवद, पनवेल (१.४.२०२५)
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