‘आधुनिक प्रौद्योगिकी ने भले ही हमारा जीवन सुलभ बना दिया हो, तब भी उससे शरीर की हलचल अल्प हुई है । दिनभर बैठकर काम करने से उत्पन्न होनेवाली ‘बैठी जीवनशैली’ स्वास्थ्य की अनेक समस्याओं को जन्म देती है । इन समस्याओं को दूर करने हेतु तथा स्वस्थ जीवन जीने हेतु ‘व्यायाम’ सबसे प्रभावी उपाय है । इस लेखमाला में हम ‘बैठी जीवनशैली के हमारे स्वास्थ्य पर होनेवाले शारीरिक एवं मानसिक दुष्परिणाम, उसके कारण तथा दुष्परिणाम टालने हेतु आवश्यक उपाय’ इत्यादि सूत्र समझनेवाले हैं । इस लेख में हम देखेंगे कि बैठी जीवनशैली के कारण कौनसी गंभीर बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं ।
१. शारीरिक बीमारियां
१ अ. हृदय की बीमारी : हृदय मांसपेशियों से बना है । बैठी जीवनशैली के कारण हृदय की मांसपेशियां दुर्बल होने लगती हैं । उसके कारण धीरे-धीरे हृदय की शरीर में रक्त की आपूर्ति करने की (पंपिंग) क्षमता अल्प होती है । उससे हृदय की बीमारी की संभावना बढती है । निरंतर बैठे रहने के कारण शरीर में चर्बी एवं कोलेस्ट्रॉल (रक्त में स्थित चर्बी) बढता है । यह चर्बी रक्त में संग्रहित होने लगती है, जिससे रक्त बहानेवाली नसें संकरी होने लगती हैं । नसें संकरी होने से हृदय को रक्त पंप करने में अधिक परिश्रम लेने पडते हैं । इसके परिणामस्वरूप रक्तचाप बढकर हृदय की बीमारी की संभावना बढती है ।
१ आ. मधुमेह एवं मोटापा : इंसुलीन (संप्रेरक) रक्त में स्थित चीनी को संतुलित रखने हेतु महत्त्वपूर्ण हॉर्माेंस (रासायनिक संदेशवाहक रेणू) हैं । बैठी जीवनशैली के कारण कोशिकाओं की इंसुलिन का प्रत्युत्तर करने की क्षमता क्षीण होकर कोशिकाएं रक्त में स्थित चीनी का उपयोग नहीं कर सकतीं । उसके कारण रक्त में चीनी का स्तर बढता है तथा उससे मधुमेह की संभावना बढती है, साथ ही ऊर्जा का व्यय अल्प होकर चयापचय की दर अल्प होती है । इसके कारण आहार से उत्पन्न होनेवाली अतिरिक्त चीनी शरीर में अनावश्यक चर्बी के रूप में संग्रहित होने लगती है तथा उससे मोटापा बढता है । मोटापे के कारण मधुमेह, उच्च रक्तचाप तथा हृदय की बीमारी होने की संभावना बढती है ।
१ इ. कैंसर : बैठी जीवनशैली के कारण कैंसर होने की संभावना बढती है, उदा. स्तन, मूत्राशय, मलाशय, बडी आंत, गुडदे, फेफडे, लीवर इत्यादि में होनेवाले कैंसर ! शोध से यह सिद्ध हुआ है कि नियमित व्यायाम के अभाव से शरीर में सूजन तथा अन्य जैवीय परिवर्तन कैंसर की संभावनाएं बढाते हैं ।

१ ई. मांसपेशियों की दुर्बलता तथा जोडों की बीमारियां : मनुष्य की शारीरिक हलचल न होने के कारण मांसपेशिया दुर्बल होती हैं । उसका परिणाम मांसपेशियों की शक्ति, लचीलापन तथा शरीर का संतुलन बनाए रखने पर होता है । इससे व्यक्ति के नीचे गिरने की तथा उससे चोट लगने की संभावना बढती है । हड्डियों की घनता अल्प होने से ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियाें का खोकला होना) तथा जोडों के दर्द जैसे बीमारियों की संभावना बढती है । व्यक्ति के लंबे समय तक बैठे रहने से उसके शरीर में स्थित जोडों तथा रीढ की हड्डियों की रचना में दोष आने के कारण जोडों तथा रीढ की हड्डियों पर अतिरिक्त तनाव आकर उससे विभिन्न बीमारियां उत्पन्न होना आरंभ होता है, उदा. गठिया, स्पॉन्डिलाइटिस (गर्दन की हड्डियों में सूजन आना), फ्रोजन शोल्डर (कंधे का गठिया), टेनिस एल्बो (कोहनी का दर्द), स्कोलियोसिस (पीठ की रीढ का बाजू में मुड जाना) इत्यादि ।
१ उ. पाचनक्रिया धीमी पड जाना : निरंतर बैठे रहने से पाचनतंत्र पर अनुकूल तनाव नहीं पडता, जिससे पाचनक्रिया धीमी पड जाती है । उसके परिणामस्वरूप आम्लपित्त बढना, बवासीर, पेट फूलना जैसे कष्ट होने लगते हैं । उसी प्रकार रोगप्रतिरोधक क्षमता क्षीण होना, अकाल केश श्वेत होना, केश झडना, थाइरॉइड ग्रंथी की बीमारियां, मासिक धर्म से संबंधित बीमारियां, गर्भाशय में गांठें होना (फाइब्रॉइड) जैसी अनेक बीमारियां उत्पन्न होती हैं ।
२. मानसिक समस्याओं में वृद्धि
बैठी जीवनशैली के कारण मस्तिष्क की कार्यक्षमता प्रभावित होती है । शारीरिक हलचल न होने के कारण तनाव उत्पन्न करनेवाले रासायनिक संदेशवाहक रेणुओं का स्तर बढता है । उसके कारण तनाव, निराश एवं चिंता, इन मानसिक समस्याओं में वृद्धि होती है । शरीर पर इसका परिणाम लंबे समय तक होता रहता है । मस्तिष्क की कार्यक्षमता अल्प होती है । नींद की गुणवत्ता भी प्रभावित होकर नींद की समस्या उत्पन्न होती है ।
बैठी जीवनशैली का परिणाम पूरे जीवन पर होता है । व्यक्ति की शारीरिक एवं मानसिक क्षमता क्षीण होती है । उसके कारण जीवन जीने की गुणवत्ता अल्प होती है । जीवन का उत्साह, ऊर्जा एवं कुल मिलाकर सदृढता क्षीण होती है । इन सभी घटकों के कारण निष्क्रीय जीवनशैली एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य की समस्या बन गई है ।
३. बैठी जीवनशैली के कारण होनेवाली बीमारियां टालने हेतु नियमित व्यायाम आवश्यक
इन बीमारियों से मुक्त होने हेतु अभी से व्यायाम करना, प्रति घंटे पश्चात उठकर ५ मिनट पैदल चलना अथवा हल्की गतिविधि करना तथा शरीर को शारीरिक परिश्रम के लिए अभ्यस्थ बनाना जैसे उपाय कर शरीर को सक्रिय रखने जैसे उपाय अपनाएंगे ।’
– श्रीमती अक्षता रूपेश रेडकर, भौतिकोपचार विशेषज्ञ (फिजियोथेरपिस्ट), फोंडा, गोवा (३.४.२०२५)

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?