निःस्वार्थ साधकवृत्ति के हिन्दू ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना कर सकते हैं; इसलिए साधना करें ! 

सनातन के ३ गुरुओं का गुरुपूर्णिमा के निमित्त संदेश !

श्रीसत्‌शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळजी

‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना, धर्मसंस्थापना का कार्य है । ईश्वरभक्त पांडव तथा छत्रपति शिवाजी महाराज ने ही धर्म की स्थापना की; क्योंकि वे उच्च स्तर के साधक थे । जिनमें साधकत्व है ऐसे व्यक्तियों से ही ईश्वर एवं गुरु धर्मसंस्थापना जैसा महान कार्य करवाते हैं । साधकत्व का अर्थ है, साधना करने के लिए जिसने ईश्वरीय गुणों को अंगीकार किया तथा सभी मानवीय स्वभावदोषों का निर्मूलन किया, ऐसा व्यक्तित्व । गुरु के मार्गदर्शन में अच्छी साधना करने के पश्चात ही स्वयं में साधकत्व उत्पन्न होता है ।

हिन्दू राष्ट्र की स्थापना की प्रक्रिया राजनैतिक अथवा भौगोलिक नहीं, अपितु पूर्णतः आध्यात्मिक है तथा विश्वकल्याण के उद्देश्य को साधनेवाली है । प्रत्येक कृति करते समय ईश्वरीय तत्त्व की अनुभूति लेकर, विश्वकल्याणकारी विचार करनेवाले व निःस्वार्थ साधकवृत्ति के हिन्दू ही हिन्दू राष्ट्र की स्थापना कर सकते हैं; इसलिए हिन्दुओ, स्वयं आध्यात्मिक क्षेत्र में अधिकारी संतों के मार्गदर्शन में साधना कर, स्वयं में साधकत्व निर्माण करें । भगवान तथा गुरु निश्चित ही हम सभी से हिन्दू राष्ट्र स्थापना का यह महान कार्य करवा लेंगे ।’

– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा नीलेश सिंगबाळ (८.६.२०२५)