School Forcibly Removed Tilak : एक ईसाई शिक्षिका ने छात्र के माथे पर लगे ‘तिलक’ को बलपूर्वक मिटाया ।

  • असम के डॉन बॉस्को विद्यालय में हिन्दू धर्म का अपमान

  • दोबारा लगाने पर पिटाई की चेतावनी दी गई ।

सिरजुली क्षेत्र स्थित डॉन बॉस्को विद्यालय

तेजपुर (असम) – सोनितपुर ज़िले के सिरजुली क्षेत्र स्थित डॉन बॉस्को विद्यालय में २३ जून को एक ईसाई शिक्षिका ने एक हिन्दू छात्र के माथे पर लगाए गए तिलक को बलपूर्वक मिटा दिया एवं दोबारा तिलक लगाकर आने पर उसे पीटने की धमकी दी । पीड़ित हिन्दू छात्र ने घर पहुँचकर यह घटना अपने अभिभावकों को बताई । अभिभावक विद्यालय पहुंचे और उन्होंने शिक्षिका के अनुचित व्यवहार के बारे में प्राचार्य को जानकारी दी । अभिभावकों ने प्राचार्य को यह भी बताया कि शिक्षिका की धमकी के कारण छात्र अत्यंत असहज और व्यथित हो गया है । प्राचार्य ने आश्वासन दिया कि ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी ।

अगले दिन, अर्थात् २४ जून को, वही आरोपी शिक्षिका रिनी रोज ने छात्र के साथ पुनः वैसा ही व्यवहार किया । शिक्षिका ने उस हिन्दू छात्र के माथे पर लगे तिलक को फिर से बलपूर्वक मिटाया और उसे पुनः धमकाया । (हिन्दू सहनशील होते हैं, इसलिए जो चाहे वह हिन्दू धर्म का अपमान करता है । इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के लिए हिन्दुओं को भी अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखने हेतु संगठित होना समय की मांग है ! – संपादक)

माथे पर लगाए गए तिलक (प्रतीकात्मक तस्वीर)

१. इसके पश्चात् पीड़ित छात्र के चाचा अवध किशोर वर्मा ने ढेकियाजुली पुलिस थाने में जाकर घटना लिखाई है । श्री वर्मा ने कहा है कि यह केवल धार्मिक भावना को आहत करने का बात नहीं है, अपितु संविधान द्वारा प्रदत्त धर्म के पालन के मूलभूत अधिकार का उल्लंघन है । यह धार्मिक भेदभाव है और जानबूझकर हिन्दू धर्म का अपमान किया गया है, ऐसा वर्मा ने अपनी थाना प्रविष्ट में उल्लेख किया है ।

२. अवध किशोर वर्मा ने बताया कि कुछ दिन पूर्व इसी कैथोलिक विद्यालय के अधिकारियों ने एक हिन्दू छात्रा के गले से तुलसी की माला भी बलपूर्वक निकाल दी थी ।

३. प्रविष्ट के पश्चात् जब पुलिस डॉन बॉस्को विद्यालय पहुँची, तो आरोपी शिक्षिका रिनी रोज अनुपस्थित थी । इस प्रकरण में पुलिस आगे की जाँच कर रही है ।

संपादकीय भूमिका

ईसाई स्कूलों में हिन्दू-विरोधी गतिविधियां चल रही हैं, इसका एक और उदाहरण । ऐसे विद्यालयों में अपने बच्चों को भेजना चाहिए या नहीं, इस पर अब हिन्दू अभिभावकों को विचार करना आवश्यक है ।