
१. ब्रह्माजी से आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त धन्वंतरि देवता !
समुद्र मंथन से प्राप्त रत्नों में से एक देवता हैं ‘धन्वंतरि’ ! श्री धन्वंतरि को ब्रह्माजी से आयुर्वेद का ज्ञान प्राप्त हुआ । हिन्दू धर्म में धन्वंतरि देवता को जगत्पालक श्रीविष्णु का रूप माना गया है । श्री धन्वंतरि को ‘देवताओं के वैद्य’ भी कहा जाता है । धन्वंतरि देवता पृथ्वी पर उपलब्ध आयुर्वेद के जनक हैं ।

२. बीमारी पर औषधि निर्माण करनेवाले भगवान !
२ अ. शरीरधर्म के अनुसार आनेवाली ‘जन्म, मृत्यु, जरा एवं बीमारी’, इन चारों अवस्थाओं को टालना मनुष्य के लिए संभव न होना : ईश्वर ने मनुष्य को पंचमहाभूतों से बना शरीर प्रदान किया है । ‘जन्म, मृत्यु, जरा एवं बीमारी’, इस शरीर के लक्षण हैं । कालांतर में शरीर का मूल रूप खो जाता है तथा मनुष्य वृद्ध बन जाता है । बीमारी का अर्थ है रोग !
२ आ. बीमारी दूर होने हेतु प्रत्येक मनुष्य के जीवन में श्री धन्वंतरि देवता का अनन्यसाधारण महत्त्व होना : ईश्वर ने मनुष्य शरीर में होनेवाली बीमारियों के निवारण हेतु आवश्यक औषधीय तत्त्वों की उत्पत्ति की है । ईश्वर की सृष्टि में प्रत्येक बीमारी के लिए औषधि उपलब्ध है; परंतु मनुष्य को इन सभी औषधियों का ज्ञान नहीं होता । युगों के अनुसार जब-जब नई-नई बीमारियां उत्पन्न हुईं, उस समय औषधियां भी प्राप्त हुई हैं; परंतु उस औषधि की खोज करने में मनुष्य को कुछ समय लगता है । मनुष्य को सभी बातों का ज्ञान न होने से उसे सर्वज्ञानी देवताओं की सहायता लेनी पडती है । बीमारी दूर होना पृथ्वी के प्रत्येक मनुष्य की आवश्यकता है तथा इसीलिए हम सभी के जीवन में श्री धन्वंतरि देवता का महत्त्व अनन्यसाधारण है ।
३. ‘श्री महाधन्वन्तरि याग’ से होनेवाले लाभ
३ अ. याग का संकल्प विश्वव्यापी है; इसलिए उसकी पूर्ति के लिए देवताओं को आना पडना : जब ईश्वर के सहस्रों भक्त तथा वेदशास्त्रसंपन्न ब्रह्मवृंद एकत्रित होकर यज्ञ करते हैं, तब वह यज्ञ ‘महायज्ञ’ बन जाता है । इस यज्ञ का संकल्प केवल व्यष्टि अथवा पारिवारिक स्तर पर सीमित न होकर वह विश्वव्यापी संकल्प है । जब पृथ्वी पर अनेक लोग एकत्रित होकर विश्वव्यापी संकल्प की पूर्ति के लिए यज्ञ करते हैं, उस समय देवताओं को भी वहां आना पडता है ।
३ आ. धन्वंतरि देवता के कारण मनुष्य को बीमारी का निवारण करनेवाली वनस्पतियों का ज्ञान होना : ‘बीज, घास, लकडी, फूल, पेड, फल, वृक्ष, जडें, पत्ते, तना, लासा, रस एवं गंध’, इनमें से ‘वनस्पति के किस रूप में संबंधित बीमारी का निवारण छिपा है’, इसका विश्व को ज्ञान देनेवाले देवता हैं श्री धन्वंतरि देवता ! काल के अनुसार ‘कैंसर’ अर्थात कर्करोग के अनेक प्रकार तथा उपप्रकार बढते ही जा रहे हैं । सांप्रत कलियुग के इस कालखंड में ऐसी बीमारी पर औषधि उपलब्ध होना अत्यंत आवश्यक है ।
आज यदि इतनी समष्टि ने भक्तिभाव से भगवान को पुकारा, तो भगवान हमारे लिए अमृतकलश लेकर आएंगे । आनेवाले समय में समस्त विश्व को इसकी अनुभूति होगी ।’
– श्री. विनायक शानभाग (आध्यात्मिक स्तर ६८ प्रतिशत, आयु ४२ वर्ष), कांचीपुरम्, तमिलनाडु. (५.५.२०२५)
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संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
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