भुकूम गांव में ‘मुस्लिम समाज नियंत्रण समिति’ की स्थापना

  • हिमाचल प्रदेश के बाद अब महाराष्ट्र में भी मुसलमानों पर बहिष्कार का अस्त्र उठाया गया 

  • बाहरी मुसलमानों को गांव में आने से रोकने के लिए अभियान 

पुणे, 8 जून (वार्ता) पुणे के मुळशी तहसील स्थित भुकूम गांव में बाहरी मुसलमानों को गांव में आने से रोकने के उद्देश्य से ‘मुस्लिम समाज नियंत्रण समिति’ की स्थापना की गई है। इस समिति के अध्यक्ष पद पर दिनेश माझिरे को नियुक्त किया गया है । पौड गांव में एक बाहरी मुसलमान द्वारा देवी की मूर्ति का अपमान किया गया था । इसी पृष्ठभूमि पर भुकूम ग्राम पंचायत क्षेत्र के मंदिरों की सुरक्षा और संपूर्ण गांव की सुरक्षा के लिए ग्रामसभा द्वारा यह समिति बनाई गई है । ग्रामसभा में मुसलमानों के संदर्भ में नियमावली भी तैयार की गई है । इस समिति पर संबंधित पुलिस थाने और ग्राम पंचायत का नियंत्रण रहेगा ।

बाहरी मुस्लिम समाज/दुकानदारों के संदर्भ में बनाई गई नियमावली ।

१. भुकूम गांव व्यापारी संघ और ग्रामसभा द्वारा नियुक्त समिति सभी दुकानों/फ्लैटों/इमारतों का जाकर प्रत्यक्ष सर्वेक्षण करके सूची तैयार करेगी ।

२. मुस्लिमों की दुकानें, पानीपुरी, नाई की दुकानें, किराना, सब्जी विक्रेता, कबाड़वाले आदि से कोई भी वस्तु न खरीदी जाए और न ही उन्हें कोई वस्तु बेची जाए, जिससे उनकी आर्थिक आमदनी बंद हो जाए और वे अपने मूल गांव वापस लौट जाएं ।

३. मुस्लिम कुक (रसोइया), वेटर, चौकीदार, निर्माण मजदूर, वॉशिंग सेंटर के कामगार यदि गांव के दुकानदारों/फ्लैटधारकों/जमीन मालिकों की जगह पर किराए पर अथवा खरीदकर रह रहे हैं, तो उन्हें उस स्थान पर मस्जिद अथवा दरगाह (मुस्लिम धार्मिक स्थल) बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी ।

४. गांव में आगे से कोई भी मुस्लिम समाज को जमीन अथवा फ्लैट न बेचे तथा न किराए पर दे । पहले जो स्थान/फ्लैट बेचे गए हैं, उनकी जानकारी एकत्र की जाए । जिन प्लॉटों/दुकानों में मुस्लिम रह रहे हैं, उन्हें तुरंत रिक्त करवाया जाए । इसका उत्तरदायित्व संबंधित मकान मालिक/फ्लैट मालिक का होगा ।

५. उपरोक्त समिति ग्रामसभा में स्थापित की गई है, और समिति द्वारा बनाए गए नियमों के पालन से जाति तथा धर्म के बीच कोई वैमनस्य उत्पन्न न हो और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर कोई अड़चन न आए, इसका विशेष ध्यान समिति को रखना होगा एवं  कानून तथा व्यवस्था का पालन करना समिति के लिए अनिवार्य होगा, ऐसा मत सचिव बी.टी. यादव (ग्राम पंचायत अधिकारी) ने व्यक्त किया । यह प्रस्ताव सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया ।

संपादकीय भूमिका 

  • भुकूम गांव की सराहनीय पहल । उनका आदर्श लेकर हर गांव में ऐसी समितियां बननी चाहिए ।
  • सरकार तथा प्रशासन हिन्दुओं की मुसलमानों से रक्षा करने में पूर्णत: सक्षम नहीं हैं, इसलिए हिन्दुओं को इस प्रकार की संस्थाएं स्थापित करनी पड़ रही हैं । आत्मरक्षा का अधिकार एक प्राकृतिक मानवाधिकार है, तथा यदि कोई भुकूम के ग्रामीणों की इस पर आलोचना करता है, तो हिन्दुओं को संगठित होकर उन्हें कठोर उत्तर देना चाहिए ।