
पुणे, २ जून (वार्ता) – ‘‘ज्ञानियों का राजा गुरु महाराव’’ – ऐसे संत श्रेष्ठ तुकाराम महाराज द्वारा जिनकी महिमा का वर्णन किया गया, उन संतश्रेष्ठ ज्ञानेश्वर महाराज ने जहां संजीवनी समाधि धारण की, वह तीर्थक्षेत्र केवल वारी में सहभागी वारकरियों के लिए ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण भारतभूमि के लिए पावन है । संत माउली की समाधि के दर्शन हेतु भारत के कोने-कोने से ही नहीं, अपितु सम्पूर्ण विश्व से श्रद्धालु आलंदी में पधारते हैं । ऐसे पवित्र तीर्थक्षेत्र के समीप पशुवधगृह (कसाईखाना) स्थापित करने का कुत्सित विचार प्रशासन को कैसे आया ? मोशी-डुडुळगांव की सीमा पर ३.७८ एकड भूमि पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका प्रशासन ने पशुवधगृह के लिए आरक्षित करने का पाप किया है । इसके संबंध का एक परिवर्धित विकास आराखडे का प्रारूप प्रशासन द्वारा उसकी अधिकृत जालस्थल पर हाल ही में प्रसारित किया गया है ।
१. मोशी के सर्वेक्षण क्रमांक ३२५ (आरक्षण क्रमांक ५/२२०) की भूमि पर यह पशुवधगृह प्रस्तावित है । यह स्थान संत ज्ञानेश्वर महाराज की संजीवनी समाधि से लगभग ४ किलोमीटर की दूरी पर एवं इंद्रायणी नदी से ढाई किलोमीटर की दूरी पर स्थित है ।
२. यह पशुवधगृह समाधि स्थान से कुछ किलोमीटर दूर होने का दावा प्रशासन कर रहा है; तथापि, आरक्षित परिसर में वारी के कालखंड में बडी संख्या में वारकरी अपनी दिंडियों सहित निवास करते हैं । वारी के समय लाखों वारकरियों का इस परिसर में आवागमन रहता है ।
३. प्रशासन पिंपरी-चिंचवड क्षेत्र के अन्य भागों में भी यह पशुवधगृह स्थापित कर सकता है; तथापि, आलंदी-देहू जैसे पवित्र क्षेत्र के समीप ही पशुवधगृह स्थापित करने का अटल निर्णय क्यों लिया गया है – इस विषय में आश्चर्य व्यक्त किया जा रहा है ।
नागरिकों को अपनी आपत्तियां प्रस्तुत करनी चाहिए !
यह परिवर्धित विकास आराखडा पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका द्वारा १५ मई को उसकी जालस्थल पर प्रसारित किया गया है । इस विषय में महानगरपालिका ने नागरिकों से आपत्तियां आमंत्रित की हैं तथा इसके लिए ६० दिवस का समय निर्धारित किया गया है । इस पशुवधगृह का विरोध करने हेतु अधिकाधिक नागरिकों को अपनी आपत्तियां महानगरपालिका के पास प्रस्तुत करना आवश्यक है ।
वैचारिक संघर्ष हेतु ‘सनातन प्रभात’ प्रतिबद्ध है !संत ज्ञानेश्वर महाराज की संजीवनी समाधि जैसे पवित्र क्षेत्र के समीप पशुवधगृह स्थापित करने का विषय केवल एक समाचार तक सीमित नहीं है । यह हिन्दू धर्म एवं हिन्दू धार्मिक स्थलों पर किया जा रहा आघात है । इस विषय में समस्त वारकरी तथा हिन्दू समाज के मध्य जागृति निर्माण कर, पशुवधगृह का आरक्षण निरस्त होने तक वैचारिक संघर्ष चलाने हेतु ‘सनातन प्रभात’ पूर्णतः प्रतिबद्ध है । |
पाठकों, वारकरियों एवं समस्त धर्मप्रेमी हिन्दुओं से आह्वान !आलंदी जैसे पवित्र स्थल पर पशुवधगृह स्थापित करने के निर्णय के विरोध में अपनी भावना दैनिक ‘सनातन प्रभात’ को अवश्य प्रकट करें । अपने विचार ‘९२२५६३९१७०’ इस भ्रमणभाष क्रमांक पर प्रेषित करें । |
आलंदी परिसर में पशुवधगृह स्थापित नहीं होगा, यह मैं पूर्णतः सुनिश्चित करती हूं ! – श्रीमती माधुरी मिसाळ, राज्यमंत्री
पशुवधगृह के संबंध में स्थानीय विधायक ने २-३ दिवस पूर्व ही हमसे संपर्क किया है । यह तक्रार नगरविकास विभाग को भेज दी गई है । इस पर हम अवश्य कार्रवाई करेंगे । आलंदी देवस्थान के परिसर में पशुवधगृह नहीं होगा, यह मैं आपको शत-प्रतिशत सुनिश्चित करती हूं, – ऐसा प्रतिपादन नगरविकास, परिवहन तथा सामाजिक न्याय राज्यमंत्री सौ. माधुरी मिसाल ने दैनिक ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि से संवाद करते हुए किया ।
पशुवधगृह हेतु आरक्षण निरस्त नहीं किया गया, तो हम मार्ग पर उतरेंगे ! – अधिवक्ता राजेन्द्र उमाप, विश्वस्त, श्री ज्ञानेश्वर महाराज संस्थान समिति
आलंदी जैसे पवित्र तीर्थक्षेत्र के निकट पशुवधगृह का निर्माण अत्यंत खेदजनक एवं प्रशासन की अक्षम्य चूक है । यह विषय मुख्यमंत्री श्री देवेंद्र फडणवीस, महानगरपालिका आयुक्त श्री शेखर सिंह एवं राज्यमंत्री सौ. माधुरी मिसाल के ध्यान में लाया गया है । उन्होंने आरक्षण त्वरित निरस्त करने का आश्वासन दिया है । अगर आरक्षण निरस्त नहीं किया गया, तो हम आंदोलन के लिए तैयार हैं । पवित्र स्थलों पर पशुवधगृह का आरक्षण नहीं होना चाहिए – इस विषय में विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए । यह आरक्षण त्वरित निरस्त किया जाए ।
आपत्तियों पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा ! – शेखर सिंह, आयुक्त, पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिक
आलंदी क्षेत्र के निकट पशुवधगृह के आरक्षण के विषय में ‘सनातन प्रभात’ के प्रतिनिधि ने पिंपरी-चिंचवड महानगरपालिका आयुक्त श्री शेखर सिंह से भेंट की । उन्होंने कहा – ‘‘नगरविकास आराखडे में भूखंड आरक्षित करने का कार्य एक संस्था को सौंपा गया था । आलंदी क्षेत्र के समीप पशुवधगृह आरक्षित करने के संबंध में कुछ शिकायतें प्राप्त हुई हैं । पूज्य स्वामी गोविंददेव गिरि महाराज के आश्रम के समीप यह आरक्षण किया गया है । उनके आश्रम से भी इस विषय में शिकायत प्राप्त हुई है । इस विकास आराखडे के संबंध में हमने नागरिकों से आपत्तियां आमंत्रित की हैं । अनेक नागरिकों से शिकायतें प्राप्त हो रही हैं । १५ जुलाई तक आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी । नागरिकों की सूचनाओं पर विचार कर उचित निर्णय लिया जाएगा ।’’
संपादकीय भूमिका
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