भारत एवं पाकिस्तान के मध्य संघर्ष का सूक्ष्म परीक्षण !

८.५.२०२५ को किया गया सूक्ष्म परीक्षण 

‘७.५.२०२५ की रात को भारत ने पाकिस्तान के ९ आतंकवादी स्थलों पर क्षेपणास्त्रों द्वारा आक्रमण कर उन्हें ध्वस्त किया । ८.५.२०२५ को पाकिस्तान ने भारत के शहरों पर क्षेपणास्त्रों द्वारा आक्रमण किया । उस समय भारत ने भी पाकिस्तान को जोरदार प्रत्युत्तर दिया । इस दिन मैं सायंकाल ५ बजे इस घटना का भगवान की कृपा से सूक्ष्म परीक्षण कर पाया । वह आगे दिया गया है ।

भारत ने क्षेपणास्त्रों द्वारा पाकिस्तान की बडी हानि की है । उसकी तुलना में पाकिस्तान को भारत की हानि करना संभव नहीं हुआ है । इस घटना से ७वें पाताल की अनिष्ट शक्तियां अस्वस्थ हो गई हैं और वे भारत पर बहुत क्रोधित हैं । जिस प्रकार व्यक्ति के शरीर में हृदय महत्त्वपूर्ण होता है, उसी प्रकार अनिष्ट शक्तियों को पाकिस्तान यह देश हृदय के समान महत्त्वपूर्ण लगता है । इसलिए अनिष्ट शक्तियां पाकिस्तान को बचाने के लिए कार्यरत हो गई हैं । अनिष्ट शक्तियों ने चीन, तुर्कीये एवं कुछ इस्लामी देशों को पाकिस्तान की सहायता के लिए भेजने का निश्चय किया है । उसके लिए अनिष्ट शक्तियां इन देशों को पाकिस्तान की सहायता करने की प्रेरणा देंगी । परिणामस्वरूप भविष्य में पाकिस्तान को भारत के विरुद्ध लडने के लिए बहुत बल मिलेगा ।

श्री. राम होनप

उसके पश्चात मुझे यह समाचार पता चला कि उसी रात को ८.३० बजे ‘तुर्कीये ने एक युद्धपोत पाकिस्तान की सहायता के लिए कराची में भेजा ।’ इससे मेरी समझ में आया कि ‘अनिष्ट शक्तियां जो निश्चित करती हैं, वह प्रत्यक्ष में भी तुरंत क्रियान्वित करती हैं ।’

१०.५.२०२५ को किया गया सूक्ष्म परीक्षण

१०.५.२०२५ को सायंकाल भारत एवं पाकिस्तान इन देशों के मध्य अकस्मात युद्धविराम की घोषणा हुई । युद्धविराम की घोषणा से ७वें पाताल की अनिष्ट शक्तियां बहुत क्रोधित हैं । वे पाकिस्तान की सहायता के लिए कार्यरत हैं । इसलिए पाकिस्तान भारत का कभी भी विश्वासघात कर सकता है । परिणामस्वरूप भारत को पाकिस्तान से सदैव सावधान रहना आवश्यक है ।’

– श्री. राम होनप (सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान), सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (१०.५.२०२५)

  • सूक्ष्म : व्यक्ति के स्थूल अर्थात प्रत्यक्ष दिखनेवाले अवयव नाक, कान, नेत्र, जीभ एवं त्वचा, ये पंचज्ञानेंद्रिय हैैं । जो स्थूल पंचज्ञानेंद्रिय, मन एवं बुद्धि के परे है, वह ‘सूक्ष्म’ है । इसके अस्तित्व का ज्ञान साधना करनेवाले को होता है । इस ‘सूक्ष्म’ ज्ञान के विषय में विविध धर्मग्रंथों में उल्लेख है ।
  • सूक्ष्म परीक्षण : कुछ घटना अथवा प्रक्रिया के विषय में चित्त को (अंतर्मन को) जो अनुभव होता है, उसे ‘सूक्ष्म परीक्षण’ कहते हैं ।
  • बुरी शक्ति : वातावरण में अच्छी तथा बुरी (अनिष्ट) शक्तियां कार्यरत रहती हैं । अच्छे कार्य में अच्छी शक्तियां मानव की सहायता करती हैं, जबकि अनिष्ट शक्तियां मानव को कष्ट देती हैं । प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के यज्ञों में राक्षसों ने विघ्न डाले, ऐसी अनेक कथाएं वेद-पुराणों में हैं । ‘अथर्ववेद में अनेक स्थानों पर अनिष्ट शक्तियां, उदा. असुर, राक्षस, पिशाच को प्रतिबंधित करने हेतु मंत्र दिए हैं ।’ अनिष्ट शक्तियों से हो रही पीडा के निवारणार्थ विविध आध्यात्मिक उपचार वेदादि धर्मग्रंथों में वर्णित हैं ।