विश्व हिन्दू परिषद ने आयोजित किया कार्यक्रम

(घरवापसी अर्थात मूल धर्म में वापस आना)
पिलीभीत (उत्तर प्रदेश) – पिलीभीत जिले के भारत-नेपाल सीमा से सटे ग्रामों में विश्व हिन्दू परिषद के एक कार्यक्रम में अनुमानतः ५०० सिखों ने घरवापसी की । ये लोग पूर्व में सिख धर्म छोडकर ईसाई बन गए थे । बेल्हा एवं ततारगंज ग्रामों में हुए समारोह में सिख समुदाय के लोग बडी संख्या में उपस्थित थे । विहिप ने इन ग्रामों में २ दिन शिविर आयोजित किए एवं लोगों को सिख धर्म में वापस लाने के लिए जागरूकता अभियान चलाया । इस समय अधिक संख्या में पुलिस व्यवस्था की गई थी ।
१. विहिप के संगठन मंत्री प्रिंस गौर ने कहा कि, नेपाल सीमा से सटे ग्रामों में लोगों से भेंट की गई एवं उन्हें सिख धर्म का महत्त्व समझाया गया । अनेक परिवारों ने स्वेच्छा से घर वापस लौटने का निर्णय लिया । गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने ‘अमृतपान’ जैसे धार्मिक कार्यक्रमों द्वारा १६० परिवारों को सिख धर्म में वापस लाया है । उसी समय, दूसरों को धर्मांतरण करने के लिए प्रवृत्त करनेवाले कुछ लोगों का भी सामाजिक बहिष्कार किया गया ।
२. पिलीभीत के बेल्हा, ततारगंज, बामनपुरी एवं सिंघारा ग्रामों में धर्मांतरण का आरोप बहुत समय से लग रहा था। । स्थानीय सिख संगठनों का दावा है कि, नेपाल के पादरी एवं कुछ स्थानीय पादरी ने आर्थिक प्रलोभन एवं उपचार सत्रों द्वारा सिखों को ईसाई धर्म स्वीकार करने के लिए प्रोत्साहित किया ।
३. अखिल भारतीय सिख पंजाबी कल्याण परिषद के अनुसार, गत कुछ वर्षों में ३ सहस्र से अधिक सिखों ने धर्मांतरण किया है । इनमें से १६० परिवारों की सूची प्रशासन को सौंप दी गई ।
४. इस प्रकरण की गंभीरता को ध्यान में रखकर नवनियुक्त जिलाधिकारी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह ने धर्मांतरण के आरोपों की जांच करने के लिए विशेष अन्वेषण दल (एस.आइ.टी.) स्थापित किया है । मनजीत कौर इस सिख महिला के परिवाद पर पुलिस ने ८ व्यक्तियों के विरुद्ध अपराध पंजीकृत किया है । इन ८ व्यक्तियों के विरुद्ध मनजीत कौर को धर्मांतरण करने के लिए विवश करने का एवं उनके खेतों की हानि करने का आरोप है । मनजीत ने बताया कि, उनके पति ने पहले ही ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया था एवं अब उन पर एवं उनके बच्चों पर भी धर्मांतरण के लिए दबाव डाला जा रहा है ।
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