कोटा में ही बच्चे आत्महत्या क्यों करते हैं ? राज्य सरकार के रूप में आप क्या करते हैं ?

कोटा (राजस्थान) में विद्यार्थियों की बढती आत्महत्याओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने भाजपा सरकार को फटकारा !

नई दिल्ली – राजस्थान के कोटा शहर में विद्यार्थियों की बढती आत्महत्याओं पर सर्वोच्च न्यायालय ने राजस्थान में भाजपा सरकार को फटकारा । न्यायालय ने कहा कि, कोटा में ही बच्चे आत्महत्या क्यों करते हैं ? इस पर राज्य के रूप में आपने विचार नहीं किया क्या ? शहर की यह स्थिति अत्यंत गंभीर है । सरकार के रूप में आप क्या करते हैं ? इन बातों को हल्के में मत लीजिए । आपने अपराध पंजीकृत करने के लिए ४ दिन क्यों लिए ?, ऐसे प्रश्न न्यायालय ने सरकार से पूछे । पुलिस ने अपराध पंजीकृत होने का न्यायालय को बताया तब ‘आप विधि के अनुसार जांच जारी रखिए’, ऐसा न्यायालय ने कहा । आत्महत्याओं के प्रकरण की जांच करने के लिए राज्य में विशेष अन्वेषण दल स्थापित किए जाने का सरकार के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को इस समय बताया ।

सर्वोच्च न्यायालय ने ऐसी घटनाएं रोकने के लिए राष्ट्रीय कार्यदल स्थापित करने का आदेश इसी वर्ष २४ मार्च को दिया है । कोटा प्रतियोगिता परीक्षाओं की पृष्ठभूमि पर चलाए जानेवाले ‘कोचिंग क्लासेस’ का केंद्र माना जाता है । विविध प्रतियोगिता परीक्षाओं में बैठनेवाले बहुत से बच्चे एवं युवक इस शहर में स्थित कोचिंग क्लासेस में सीखने के लिए आते हैं । वर्तमान में कोटा में विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्याओं की मात्रा बढी है, इस कारण कोटा शहर का नाम चर्चा में है ।

१. आइआइटी खरगपुर में सीखनेवाला एक २२ वर्षीय विद्यार्थी ४ मई को उसके छात्रावास के कक्ष में मृत अवस्था में मिला । इस वर्ष कोटा शहर में लगभग १४ आत्महत्याओं की घटनाओं का पंजीकरण हुआ है ।
२. इस आइआइटी खरगपुर के अधिवक्ता एवं पुलिस अधिकारी के स्पष्टीकरण से न्यायालय का समाधान नहीं हुआ । न्यायालय ने कहा कि, हम इस प्रकरण में कठोर विचार कर सकते थे । हम संबंधित अधिकारक्षेत्र के पुलिस थाने के प्रमुख पुलिस अधिकारी के विरुद्ध अवमानना प्रकरण में कार्रवाई भी कर सकते थे । (न्यायालय को ऐसा बताना पडता है, इसका अर्थ पुलिस निष्क्रिय हैं, यह स्पष्ट होता है । ऐसे पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई करने के लिए सरकार के संबंधितों पर भी कार्रवाई होना आवश्यक है ! – संपादक)

संपादकीय भूमिका

कोटा में गत कुछ वर्षों से विद्यार्थियों द्वारा आत्महत्याएं की जा रही हैं, ऐसे में इस संदर्भ में युद्धस्तर पर (शीघ्रातिशीघ्र) उपाय निकालना आवश्यक हो गया है !