अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने वक्फ अधिनियम का समर्थन किया !

अजमेर (राजस्थान) – मुझे लगता है कि वक्फ अधिनियम में संशोधन की आवश्यकता है । यह विधेयक पारदर्शिता लाएगा और वक्फ संपत्तियों की सुरक्षा करेगा । अतिक्रमण हटेगा और वक्फ किराया बढेगा, जो समाज के लिए लाभकारी होगा । विरोध करना और समर्थन करना लोकतंत्र का भाग है । यदि कोई संवैधानिक पद्धति से विरोध कर रहा है तो इसमें कोई समस्या नहीं है; परंतु मेरा मानना है कि वक्फ अधिनियम में परिवर्तन करना आवश्यक है, ऐसा अखिल भारतीय सूफी सज्जादानशीन परिषद के अध्यक्ष और अजमेर दरगाह के आध्यात्मिक प्रमुख के उत्तराधिकारी सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने कहा है ।
हालांकि कोई मस्जिद नहीं ली जा रही है, फिर भी लोगों को भ्रमित किया जा रहा है !
सैयद नसरुद्दीन चिश्ती ने आगे कहा कि इस सुधार का अर्थ यह नहीं है कि मस्जिद या संपत्ति छीन ली जाएगी । ऐसा कहना अनुचित होगा । यह लोकतंत्र का एक भाग है । सरकार किसी जल्दबाजी में नहीं है; संयुक्त संसदीय समिति में चर्चा के उपरांत यह विधेयक बहुत सरलता से संसद में प्रस्तुत किया गया है । जहां कई मुस्लिम धार्मिक नेता इस विधेयक का समर्थन कर रहे हैं, वहीं ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड इस पर आपत्ति जता रहा है । इस विधेयक का विरोध करने के लिए लोगों को काली पट्टियां बांधने को क्यों कहा गया ? संशोधित कानून अभी तक सदन में प्रस्तुत नहीं किया गया है । उसे पहले आने दो । फिर आप यह कहकर लोगों को भ्रमित न करें कि ‘हमारी मस्जिद छीन ली जाएगी ।’ संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने यह कहा है कि ‘हम कोई मस्जिद नहीं लेंगे’ । तथापि आप (लोगों को) भ्रमित कर रहे हैं ।
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