महाराष्ट्र मंदिर महासंघ की पहल से मिली ऐतिहासिक जीत

नागपुर, २६ मार्च (वार्ता) – श्री विठ्ठल रुखमाई संस्थान, रेवसा (ता. जिला अमरावती) की ३० करोड़ रुपये मूल्य की बहुमूल्य कृषि भूमि अंततः मंदिर के नाम पर पुनः पंजीकृत की जाएगी। यह ऐतिहासिक विजय मंदिर महासंघ के प्रभावी अनुवर्तन के कारण प्राप्त हुई। राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से हड़पी गई यह जमीन वापस मिलने से श्रद्धालुओं में संतोष का माहौल है। मंदिर महासंघ के प्रदेश पदाधिकारी अनूप प्रमोद जायसवाल ने आयोजित प्रेस वार्ता में इस ऐतिहासिक जीत की जानकारी दी। इस अवसर पर महासंघ के जिला समन्वयक तथा श्रीपिंगलादेवी संस्थान नेरपिंगलाई के अध्यक्ष विनीत पखोडे, हिन्दू जनजागृति समिति के जिला समन्वयक नीलेश टवलारे, अधिवक्ता अभिजीत बजाज, संस्थान के न्यासी राजेंद्र वाकोडे तथा हरिभाऊ वाकोडे, समिति के हरिदास मानवटकर तथा सचिन वैद्य उपस्थित थे। मंदिर महासंघ ने मांग की है कि राज्य सरकार मंदिर की कृषि भूमि में अनियमितताओं को रोकने और भ्रष्ट अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही करने के लिए अँटी लँड ग्रॅबिंग (‘ भूमि हडपने विरोधी ‘) कानून का प्रावधान करे।
तत्कालीन तहसीलदार से मिलीभगत कर जमीन हडप ली गई !
मौजा रेवसा में ग्रुप नं. १६५ , क्षेत्रफल ३ हेक्टर ६९ आर.यह कृषि भूमि ‘श्री विठ्ठल रुखमाई संस्थान’ के स्वामित्व में है; हालांकि, इस जमीन को हड़पने की नीयत से प्रदीप त्रिंबकराव वाकोडे और प्रवीण त्रिंबकराव वाकोडे ने तत्कालीन तहसीलदार संतोष काकड़े के समक्ष जमीन के ७ / १२ भाग से संस्था का नाम हटाकर अपने नाम पर दर्ज करने का आवेदन प्रस्तुत किया। ९ मई २०२२ को तहसीलदार काकड़े ने राजस्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए ७ / १२ डोक्यूमेण्ट से संस्थान का नाम हटा दिया और अवैध रूप से इसे वाकोडे बंधुओं के नाम पर दर्ज कर दिया।
आई.ए.एस. अधिकारी से तहसीलदार का आदेश रद्द
राजेंद्र पद्माकर वाकोडे ने इस निर्णय के विरुद्ध उप-विभागीय अधिकारी, अमरावती के समक्ष अपील की। अपील मामले में वाकोडे बंधुओं और राजस्व अधिकारियों के बीच मिलीभगत उजागर हुई। भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी रिचर्ड यंथन ने निष्कर्ष निकाला कि तहसीलदार काकड़े द्वारा पारित आदेश स्पष्ट रूप से वित्तीय लाभ के उद्देश्य से बनाया गया था और १ अगस्त २०२३ को तहसीलदार काकड़े के आदेश को रद्द कर दिया।
मंदिर महासंघ के अनुवर्ती कार्यवाही के कारण मंदिर भूमि स्वामित्व का संरक्षण
इस आदेश से राजस्व विभाग को भारी नुकसान हुआ। उपविभागीय अधिकारियों के आदेश के विरुद्ध अपील मामले में अमरावती के अतिरिक्त जिला कलेक्टर ने मामले की गहन जांच और पुनः सुनवाई के निर्देश दिए। मंदिर महासंघ ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार मंदिर के हित में तहसीलदार को एक ज्ञापन सौंपा। यह अनुवर्ती कार्रवाई सफल रही और तहसीलदार विजय लोखंडे ने २० मार्च २०२५ को सतर्क रुख अपनाते हुए संस्था के पक्ष में अंतिम निर्णय दिया ।