नई देहली – गोधरा घटना के पश्चात गुजरात के वडोदरा गांव मे हुए दंगों के प्रकरण में सर्वोच्च न्यायालय ने ६ हिन्दुओं को निर्दोष मुक्त किया । इस विषय में घोषित परिणाम में सर्वाेच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिंह तथा मनोज मिश्रा के खंडपीठ ने कहा कि मात्र अपराध स्थल पर उपस्थित रहने से किसी व्यक्ति को हम अपराधी सिद्ध नहीं कर सकते ।
१. वर्ष २००२ में हुए दंगों में समूह ने पुलिसकर्मियों पर पथराव किया तथा वाहनों की तोडफोड की । तत्पश्चात पुलिस ने गोलीबारी कर ७ लोगों को बंदी बनाया था ।
२. वर्ष २००५ में विशेष न्यायालय ने प्रमाण के अभाव में सभी को निर्दोष के रूपमें मुक्त किया था; परंतु २०१६ में गुजरात उच्च न्यायालय ने उनमें ६ लोगोें को अपराधी सिद्ध किया था ।
३. सर्वोच्च न्यायालय ने उच्च न्यायालय का निर्णय निरस्त किया एवं कहा कि इन अपराधियों के पास दंगा भडकाने हेतु प्रयुक्त किए गए कोई भी शस्त्र अथवा प्रमाण नहीं मिले हैं ।
४. खंडपीठ ने कहा कि, ‘एक निर्दोष व्यक्ति की स्वतंत्रता छीन लेना अपराध है ।’ इस निर्णय से याचिकाकर्ता धीरूभाई भैलालभाई चौहान तथा अन्यों को समाधान मिला है ।
संपादकीय भूमिका२३ वर्ष उपरांंत मिला न्याय एक प्रकार का अन्याय ही है, यदि समाज को ऐसा प्रतीत हुआ, तो उसमें क्या चूक है ? |

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