हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन के आपत्ति के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश में उल्लेख ।

प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) – संभल की शाही जामा मस्जिद के पूर्व में श्री हरिहर मंदिर होने के प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (ASI) को मस्जिद का दौरा करने और रमज़ान से पहले कितनी रंगाई-पुताई आवश्यक है, यह देखने के आदेश दिए। पुरातत्व विभाग ने सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन न्यायालय ने इसे अस्वीकार करते हुए कहा कि इसकी आवश्यकता नहीं है।
हिन्दू पक्ष के अधिवक्ता पू. हरि शंकर जैन ने कहा, “रंगाई-पुताई के बहाने मस्जिद में उपस्थित हिंदू चिह्न मिटाए जा सकते हैं। न्यायालय को इस संरचना को केवल मस्जिद के रूप में नहीं देखना चाहिए।” इसके बाद न्यायालय ने अपने आदेश में ‘कथित मस्जिद’ शब्द का प्रयोग किया। साथ ही आश्वासन दिया कि हिंदू प्रतीकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाएगा।
पुरातत्व विभाग की टीम कल, २८ फरवरी को मस्जिद की जांच कर न्यायालय में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। मस्जिद की प्रबंधन समिति की याचिका पर न्यायालय ने यह आदेश दिया। १ मार्च से शुरू होने वाले रमज़ान के अवसर पर मस्जिद में रंगाई-पुताई और अन्य कार्य करने की समिति की इच्छा थी; लेकिन पुलिस और पुरातत्व विभाग ने इसका विरोध किया था।
न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि रमज़ान के दौरान धार्मिक सौहार्द बनाए रखना चाहिए और दोनों पक्षों के हितों की रक्षा करनी चाहिए।
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