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(उर्स का अर्थ है मुसलमानों का मेला)
नई मुंबई – यहां के प्रस्तावित हवाई अड्डे के समीप पूर्ववर्ती फुल पीर शाह बाबा दरगाह के स्थान पर उर्स मनाने की अनुमति नहीं मिलेगी, ऐसा आदेश मुंबई उच्च न्यायालय ने दिया ।
१. नवंबर २०२४ में पनवेल के निकट की सिडको की भूमि पर प्रस्तावित हवाई अड्डे के समीप बनाई गई फुल पीर शाह बाबा दरगाह गिराई गई । उसके उपरांत सिडको ने वहां घेरा बनाया । इस संदर्भ में लंबे समय तक न्यायालयीन लडाई चली थी ।
२. सिडको की ओर से प्राधिकरण को शपथपत्र के माध्यम से उस दरगाह पर की गई कार्यवाही की जानकारी दी गई थी ।
३. स्थानीय लोगों ने छत्रपति संभाजीनगर के वक्फ प्राधिकरण को आवेदन देकर गिराई गई दरगाह की भूमि पर उर्स मनाने की अनुमति मांगी थी तथा इस आवेदन के आधार पर वहां के प्राधिकरण ने उसकी अनुमति भी दी थी ।
४. सिडको ने इसके विरोध में याचिका प्रविष्ट की । इस याचिका पर न्यायालय ने उक्त निर्णय दिया । इस संबंध में अगली सुनवाई २५ फरवरी को होगी ।
५. ‘जहां की दरगाह तोडी गई हो, उस स्थान पर उर्स मनाने की अनुमति देना उचित नहीं होगा’, ऐसी टिप्पणी कर मुंबई उच्च न्यायालय ने वक्फ बोर्ड प्राधिकरण का आदेश निरस्त किया । न्यायाधीश संदीप मारणे की एकल पीठ के सामने इस याचिका पर सुनवाई हुई ।
६. सिडको की ओर से महाधिवक्ता बीरेंद्र सराफ ने यह दावा करते हुए कहा, ‘जहां दरगाह नहीं है, उस स्थान पर उर्स मनाने की अनुमति दी ही नहीं जा सकती । न्यायालय ने उनका यह युक्तिवाद स्वीकार कर कहा, ‘‘इस दरगाह को तोडा गया है, तब भी वहां उर्स मनाने की अनुमति क्यों दी गई, यह प्रश्न उठता है ।
संपादकीय भूमिका
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