SC On Sambhal Masjid Survey : संभल मस्जिद की सर्वेक्षण रिपोर्ट सार्वजनिक न करें !

  • उच्चतम न्‍यायालय के दिवानी न्‍यायालय का आदेश

  • ६ जनवरी को उच्चतम न्‍यायालय करेगा अगली सुनवाई

न‌ई देहली – उच्‍चतम न्‍यायालय ने उत्तर प्रदेश के संभल में शाही जामा मस्जिद की हुई सर्वेक्षण रिपोर्ट को सार्वजनिक न करने का आदेश दिवानी न्‍यायालय को दिया है । विशेष बात यह है कि अभी तक सर्वेक्षण दल ने प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत नहीं किया है । न्‍यायालय ने इस दल को बंद लिफाफे में प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के लिए कहा है । उच्चतम न्यायालय ने आदेश में यह भी कहा कि ८ जनवरी तक इस प्रकरण में कोई कार्यवाही न हो । ‘संभल में शांति आवश्‍यक है’, यह कहते हुए अपने इस आदेश के पीछे का कारण स्‍पष्‍ट किया । उच्चतम न्यायालय इस प्रकरण में ६ जनवरी को अगली सुनवाई करेगा । उसी समय मस्जिद समिति को निचली अदालत के दिवानी न्‍यायालय के आदेश को उच्‍च न्‍यायालय में चुनौती देने की अनुमति दी है । शाही मस्जिद पहले का हरिहर मंदिर है, यह दावा हिन्दू कर रहे हैं । इस संबंध में उन्होंने दिवानी न्‍यायालय में याचिका डाली है । इसपर से स्थानीय न्‍यायालय ने सर्वेक्षण करने का आदेश दिया था ।

१. दिवानी न्‍यायालय के आदेश से अधिवक्‍ता आयुक्‍त रमेश सिंह राघव नेतृत्‍व में इस मस्जिद का सर्वेक्षण करने गए थे । इस विषय में अधिवक्‍ता राघव ने कहा कि २४ नवंबर को सर्वेक्षण के समय हिंसा हुई थी । इसलिए, प्रतिवेदन तैयार नहीं किया जा सका ।

२. जामा मस्जिद के अधिवक्‍ता शकील अहमद ने कहा कि हमने न्‍यायालय इस प्रकरण से संबंधित सभी कागद पत्रों की मांग की है । आज सर्वेक्षण का प्रतिवेदन प्रस्तुत नहीं किया गया । इसके बाद मस्जिद का सर्वेक्षण नहीं होगा । दिवानी न्‍यायालय अब इस प्रकरण में सुनवाई ८ जनवरी २०२५ को करेगा । सर्वेक्षण रिपोर्ट किस दिन प्रस्तुत करनी है, यह न्यायालय बाद में बताएगा ।

३. शुक्रवार की नमाज को ध्यान में रख कर संभल में भारी पुलिसबल तैनात किया गया है । इसके पहले पुलिस आयुक्‍त अंजनेय कुमार सिंह ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति स्थानीय मस्जिद में नमाज अदा करेगा । बाहर के लोग यहां घुस न पाएं, इसपर हमारी दृष्टि रहेगी ।

४. संभल के हिंसा की जांच के लिए राज्‍य सरकार ने ३ सदस्‍यीय न्‍यायिक आयोग गठित किया है । यह आयोग २ महीने में जांच पूरी कर रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा ।

जमियत उलेमा-ए-हिंद हिंसाचार मारे गए मुसलमानों के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए देगा ।

जमियत उलेमा-ए-हिंद संगठन के अध्‍यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने हिंसा में मारे गए ५ मुसलमान युवकों को ‘शहीद’ (धर्म के लिए प्राण देनेवाला) बताया है और उनके परिजनों को पांच-पांच लाख रुपए देने की घोषणा की है । (जिहादी आतंकवाद के आरोपियों तथा दंगाइयों को जमियत-उलेमा-ए-हिंद सदैव से आर्थिक सहायता करती आ रही है । इस संगठन को इतना सारा पैसा हलाल जिहाद से मिलता है, यह समझ लीजिए ! – संपादक)