कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, अर्थात यमदीपदान के दिन अपमृत्यु निवारणार्थ ‘श्री यमधर्मप्रीत्यर्थं यमतर्पणं करिष्ये ।’ ऐसा संकल्प कर यम के १४ नामों से तर्पण करें ।

यमदीपदान का महत्त्व !
इसी दिन यम को दीपदान करना होता है । यम मृत्यु एवं धर्म के देवता हैं । ‘प्रत्येक मनुष्य की मृत्यु निश्चित है’, इसका भान सतत व्यक्ति को रखना आवश्यक है । इससे मनुष्य के हाथों कभी बुरे कर्म अथवा धन का अपव्यय नहीं होगा । अपमृत्यु को टालने के लिए धनत्रयोदशी, नरक चतुर्दशी एवं यमद्वितीया के दिनों पर मृत्यु के देवता यमधर्म का पूजन किया जाता है । इस दिन यमराज नरक में पडे जीवों को उस दिन के लिए मुक्त करते हैं ।
दीपदान के समय यह प्रार्थना करें !
यम को दीपदान देकर कहें, ‘हे यमदेवता, इस दीप समान हम सतर्क रहें, जागरूक रहें । जागरूकता एवं प्रकाश के प्रतीक दीप आपको अर्पण कर रहे हैं, आप इन्हें स्वीकार करें । हम नहीं जानते कब आपका आगमन हो जाए; इसलिए हम समय-समय पर अपना लेखा-विवरण बनाकर रखते हैं, जिस कारण कुछ अधूरा छोड देने की चिन्ता नहीं होती । हम जानते हैं कि आप अकस्मात कभी भी पधार सकते हैं ।’
– श्री. सुनील घनवट, महाराष्ट्र एवं छत्तीसगढ राज्य संगठक,हिन्दू जनजागृति समिति.
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
कोटि कोटि प्रणाम !
सनातन धर्म के मूर्तिमान स्वरूप सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के श्री चरणों में कोटि-कोटि वंदन !
संपादकीय : गुरुभ्यो नमः ।
प.पू. भक्तराज महाराजजी द्वारा अपने शिष्य डॉ. आठवलेजी के प्रति व्यक्त गौरवोद्गार !
इरोड (तमिलनाडु) में ‘महासुदर्शन याग’ एवं ‘आयुष्य होम’ भावपूर्ण वातावरण में संपन्न !