श्री गुरु के प्रति निष्ठा, श्रद्धा एवं भक्ति बढाएं !

श्री गुरु के मार्गदर्शन में साधना करते समय साधक एवं शिष्य का ध्येय होता है आध्यात्मिक उन्नति करना । गुरु के प्रति निष्ठा अर्थात शिष्य की संदेहरहित अवस्था, गुरु के प्रति श्रद्धा अर्थात ‘गुरु के कारण मेरा परममंगल अवश्य होगा’, यह दृढता से लगना । गुरु के प्रति भक्ति अर्थात गुरु को जो भाता है, वह भक्तिभाव से करना । गुरु को व्यापक धर्मकार्य प्रिय है । वह लगन से करना सच्ची ‘गुरुभक्ति’ है । यह कार्य करते समय कोई भी संदेह न रखना सच्ची गुरुनिष्ठा है एवं ‘यह धर्मकार्य परिपूर्ण करने से मेरी आत्मोन्नति निश्चित ही होगी’, यही ‘गुरु के प्रति’ श्रद्धा है ! इसीलिए गुरुपूर्णिमा से श्री गुरु के प्रति निष्ठा, श्रद्धा एवं भक्ति बढाएं ।’
– श्रीसत्शक्ति (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी, सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी की एक आध्यात्मिक उत्तराधिकारिणी
हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के लिए आवश्यक सद्गुण बढाएं !

हिन्दू राष्ट्र-स्थापना का काल समीप है; परंतु हम उसे सहजता से अनुभव कर पाएंगे, ऐसा नहीं है । उसके लिए ईश्वरभक्ति, सत् के लिए त्याग करने की तैयारी आदि सद्गुण हममें होने चाहिए । उसे संग्रहित करने के लिए गुरुपूर्णिमा जैसा अवसर नहीं । गुरुपूर्णिमा के निमित्त एक सहस्र गुना कार्यरत गुरुतत्त्व का लाभ उठाने के लिए तन-मन-धन अर्पित कर इस उत्सव में सम्मिलित हों । गुरु से लगन से प्रार्थना करें कि ‘हमें हिन्दू राष्ट्र-स्थापना के कार्य में सम्मिलित करवा लें । गुरुकार्य में नित्य सम्मिलित हों एवं जीवन सार्थक कर लें !’
– श्रीचित्शक्ति (श्रीमती) अंजली मुकुल गाडगीळजी (सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी की एक उत्तराधिकारिणी)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?