साधना करने से ‘एकै साधे सब सधै, सब साधै सब जाय ।’ की अनुभूति ली जा सकती है !  

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी द्वारा अनुभव किया गया श्री गुरु का महत्त्व !

प.पू. भक्तराज महाराजजी (प.पू. बाबा) से हुई पहली भेंट के कुछ विशेष प्रसंग !

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के गुरु प.पू. भक्तराज महाराजजी के महानिर्वाण दिवस के उपलक्ष्य में उनके चरणों में सनातन परिवार का कृतज्ञतापूर्वक नमस्कार !

प.पू. भक्तराज महाराजजी के आनंददायक सान्निध्य की कुछ अविस्मरणीय स्मृतियां तथा अनुभव की गई उनकी कृपा !

प.पू. भक्तराज महाराजजी कटहल की भांति थे ! कटहल जैसे ऊपर से कंटीला; परंतु उसके अंदर जैसे बहुत मीठा मगज होता है, बिलकुल वैसे ही थे ! उसके कारण ही उनका सान्निध्य हमें बहुत अच्छा लगता था ।

शिष्य डॉ. आठवलेजी के गुरु संत भक्तराज महाराजजी से संबंधित ग्रंथ !

ये ग्रंथ साधकों की भावजागृति कर उन्हें आनन्द एवं शांति की अनुभूति प्रदान करनेवाली अनमोल धरोहर ही हैं ।

प.पू. भक्तराज महाराजजी की कृपा से साधक का विभिन्न व्यसनों से मुक्त होना

प.पू. भक्तराज महाराजजी की समाधि के दर्शन करने हेतु कांदळी जाने पर वहां हुई अनुभूति

कलियुग में ईश्‍वरप्राप्ति का सुलभ एवं सरल मार्ग है नामस्मरण !

नाम की महिमा ऐसी है कि उसके कारण मन के विकार दूर होते हैं तथा अंतःकरण शुद्ध होता है एवं सद्गुरु को हृदय में विराजमान करने के लिए नाम अति आवश्यक है ।

शिष्य डॉ. आठवलेजी के गुरु संत भक्तराज महाराजजी से सम्बन्धित ग्रन्थ !

ये ग्रन्थ साधकों की भावजागृति कर उन्हें आनन्द एवं शान्ति की अनुभूति देनेवाली अनमोल धरोहर ही हैं ।

साधना के बल पर हम समाज में स्थित नकारात्मक शक्तियों से से लडकर हिन्दू राष्ट्र ला सकते हैं ! – अधिवक्ता कृष्णमूर्ती पी., कोडागू, कर्नाटक

अधिवक्ता कृष्णमूर्ति धर्मनिष्ठ अधिवक्ता हैं । उनका अखंड नामजप चलता है । यात्रा में वे प.पू. भक्तराज महाराजजी के भजन सुनते हैं । भजन सुनते-सुनते ‘यात्रा कब पूर्ण हुई’, यह समझ में ही नहीं आता ।

ईश्वर के प्रति भाव एवं निरपेक्षता से धर्मकार्य करनेवाले अधिवक्ता पी. कृष्णमूर्ती का सूक्ष्म प्रयोग !

भजन सुनते समय उनकी आंखों में भावाश्रु आते हैं । धर्मकार्य के लिए वे अपने निजी खर्च कर विविध गांवों में जाकर हिन्दुत्वनिष्ठों की कानूनी सहायता करते हैं । उनका कार्य निरपेक्ष होता है ।