अध्यात्म जीवन का अभिन्न अंग है । अध्यात्म ने धर्म, राष्ट्र, अर्थ, राजनीति, सामाजिक क्षेत्र, खेल इत्यादि क्षेत्रों में अपनी पेंठ बनाई है । प्रत्येक क्षेत्र के व्यक्ति ने यदि अध्यात्म अपनाया, तो उन्हें निश्चित ही उसका लाभ मिलता है । इसी पद्धति से क्रिकेट के विभिन्न खिलाडियों द्वारा अध्यात्म को अपनाने से उन्हें मिले लाभ दर्शानेवाले कुछ सूत्र श्री गुरुचरणों में अर्पण कर रहा हूं ।
संकलनकर्ता : श्री. सागर निंबाळकर, सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा.

१. ‘अर्जुन पुरस्कार’ एवं ‘पद्मभूषण’ प्राप्त सुनील गावस्कर

टेस्ट क्रिकेट जगत में सर्वप्रथम १०,००० से अधिक रन बनानेवाले सुनील गावस्कर पर अध्यात्म का प्रभाव था । श्री. गावस्कर ने अपनी जीवनी में इसका उल्लेख किया है । उन्होंने एक भेंटवार्ता में श्री सत्य साईबाबा के विषय में हुई अनुभूतियां विशद की हैं । इसमें उन्होंने बताया, ‘सत्य साईबाबा की आध्यात्मिक सीख का मुझ पर अत्यधिक परिणाम हुआ । उनके ग्रंथ पढकर मुझमें परिस्थिति को स्वीकार करना, प्रतिकूल परिस्थिति में भी शांत रहना इत्यादि गुणों की वृद्धि हुई ।’
१ अ. सुनील गावस्कर की एकाग्रता का उदाहरण : एक बार भारत एवं पाकिस्तान के मध्य क्रिकेट मैच चल रहा था । उसमें गावस्कर बैटिंग कर रहे थे । सामने ही दाहिनी ओर जावेद मियांदाद क्षेत्ररक्षण कर रहे थे । उस समय उनमें निम्नांकित संवाद हुआ –
जावेद : क्षमा कीजिए सनीभाई ! मैंने आपको गाली दी ।
सुनील : गाली दी ? कब ?
जावेद : जी हां, यह क्या, मैं आपके सामने ही तो खडा हूं । यहां खडे होकर ही मैंने गाली दी ।
सुनील : मैंने तो कुछ सुना ही नहीं !
जावेद : आप क्या बोल रहे हैं ? मैं तो यही खडा हूं ।
सुनील : मुझे लगा कि तुम मेरे पीछे खडे सलीम युसूफ के साथ कुछ बात कर रहे हो ।
जावेद : अंतिम बार पूछता हूं, सचमुच आपने कुछ भी नहीं सुना ?
सुनील : नहीं ।
जावेद : (निराशा के सुर में) अरे अरे, तो मैंने बिना किसी कारण ही आपसे क्षमा मांगी !
इस प्रसंग से ध्यान में आता है कि सुनील गावस्कर के शांत रहने तथा अनुचित कृतियों की अनदेखी करने के गुण का, विपक्षी संघ के खिलाडी पर अपनेआप ही परिणाम होता था ।
१ आ. सुनील गावस्कर के विषय में अन्य देश के तत्कालीन खिलाडियों के विचार
१ आ १. इमरान खान, पाकिस्तान : गेंदबाज का मुख्य अस्त्र होता है उछलती हुई गेंद ! जब हम सुनील गावस्कर को उछलनेवाली गेंद डालते थे, तब वे उस गेंद को शांति से छोड देते थे, जिससे उन्हें आउट करना हमारे लिए कठिन होता था ।
सुनील गावस्कर ने जिस काल में अच्छा खेल दिखाया, वह काल आक्रामक गेंदबाजों का काल था । उस समय सुनील गावस्कर बिना हेल्मेट पहने वेस्ट इंडिज के ७ फुट ऊंचे गेंदबाजों की तीव्र गति गेंदों का सामना करते थे । अतः मेरे विचार से विश्व के महान बल्लेबाज सुनील गावस्कर ही हैं !
१ आ २. विवियन रिचर्ड्स, वेस्ट इंडिज : मैं वेस्ट इंडिज का खिलाडी हूं, इसलिए मुझे वेस्ट इंडिज के माइकल होल्डिंग, जोएल गार्नर, माल्कम मार्शल, एंडी रॉबर्ट्स जैसे बल्लेबाजों को भयभीत करनेवाले गेंदबाजों का कभी सामना नहीं करना पडा; परंतु इन सभी पर विजय प्राप्त की सुनील गावस्कर ने ! उन्होंने बिना किसी भय के, इन गेंदबाजों के साथ ही अन्य देशों के भेदक गेंदबाजों का भी सामना करते हुए अनेक रन बनाए तथा ‘सर्वाेत्तम बल्लेबाज’ सिद्ध हुए ।
२. ‘मेजर ध्यानचंद खेलरत्न पुरस्कार’ तथा ‘भारतरत्न’ प्राप्त सचिन तेंडुलकर

२ अ. सचिन तेंडुलकर द्वारा अध्यात्म का आधार लेने के कुछ प्रसंग
२ अ १. सचिन तेंडुलकर श्री सत्यसाईबाबा के भक्त हैं । उन्होंने कृतज्ञतापूर्वक कहा है कि श्री सत्यसाईबाबा ने मुझे सिखाया है कि मनःशांति कैसे पाएं तथा करुणा को जीवन में कैसे उतारें ।
२ अ २. सचिन तेंडुलकर अपनी क्रिकेट की सामग्री के साथ सदैव श्री गणेशजी का चित्र रखते थे । खेल के कठिन समय में भी वे श्री गणेशजी को पुकारते थे ।
२ अ ३. जब सचिन तेंडुलकर के हाथ की कोहनी (टेनिस एल्बो) को चोट लगी तथा उन्हें खेलना स्थायी रूप से बंद करना पडेगा, ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई, तब उन्होंने श्रद्धापूर्वक नारायण नागबलि जैसे आध्यात्मिक अनुष्ठान किए ।
२ अ ४. भारतीय संस्कारों का पालन करनेवाले सचिन तेंडुलकर क्रिकेट जगत के एक अजातशत्रु एवं सुशील खिलाडी माने जाते हैं । उनके २४ वर्षाें के क्रिकेट जीवन में उन्होंने कभी भी अनुचित आचरण नहीं किया तथा कभी किसी के साथ उनका विवाद नहीं हुआ ।
३. ‘अर्जुन पुरस्कार’ एवं ‘पद्मश्री’ प्राप्त विराट कोहली

विराट कोहली वर्तमान पीढी के अत्यंत आक्रामक खिलाडी माने जाते थे । वर्ष २०१८ तक उनके अहंकार से संबंधित सूत्र अधिक चर्चा में आते थे; परंतु आगे जाकर विराट ने आध्यात्मिक दृष्टिकोण, ध्यान-धारणा आदि का आधार लेना आरंभ किया । वे निमकरोली बाबा के आश्रम में गए । वहां के अनुयायियों ने उनका आध्यात्मिक मार्गदर्शन किया । विराट कोहली ने प्रेमानंद महाराजजी से भी मार्गदर्शन लिया । उसके कारण विराट में आमूलचूल परिवर्तन आया ।
३ अ. विराट में आया परिवर्तन दर्शानेवाला प्रसंग : वर्ष २०१९ के विश्व कप में भारत-ऑस्ट्रेलिया के मध्य मैच चल रहा था । उसमें जब ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ बल्लेबाजी करने आए, तब भारतीय दर्शक उनका उपहास करने लगे तथा उन्हें चिढाने लगे । तब विराट कोहली ने आगे आकर दर्शकों को शांत किया तथा हाथ हिलाकर दर्शकों को समझाया कि ‘स्मिथ के खेलने पर लगा प्रतिबंध हटाए जाने के उपरांत वे पहली बार क्रिकेट खेलने उतरे हैं; इसलिए आप तालियां बजाकर उन्हें प्रोत्साहित करें !’ दर्शकों ने विराट की बात सुनकर स्मिथ को प्रोत्साहित किया ।
३ आ. विराट द्वारा व्यक्त की गई कृतज्ञता ! : विराट कोहली ने सार्वजनिक रूप से बताया, ‘‘ध्यानधारणा के कारण ही मैं शांत, मन से सक्षम तथा भावनात्मक दृष्टि से संतुलित बना । उसके कारण ही मेरा क्रिकेट जीवन निखरता चला गया ।’’
४. अध्यात्म का महत्त्व समझ लें !

४ अ. जब खिलाडी मैदान पर खडा होता है, तब उसके मन पर उसके देश के करोडों लोगों की अपेक्षाओं का बोझ होता है । असफल होने का भय, सफलता की कामना तथा प्रति क्षण आनेवाला मानसिक दबाव, इनसे वह घिर जाता है । ऐसे समय में केवल शारीरिक कौशल पर्याप्त नहीं होता, अपितु विजय प्राप्त करने हेतु सद्गुणों की, अर्थात अध्यात्म की आवश्यकता होती है ।
४ आ. अध्यात्म वह ‘शक्ति’ है, जो गावस्कर को उछलती हुई गेंदों के सामने भी शांति से डटकर खडे रहने की तथा विरोधी खिलाडियों की गालीगलोच को भी अनदेखा कर ‘निष्काम कर्म’ करने की प्रेरणा देता है ।

४ इ. अध्यात्म वह ‘करुणा’ है, जो सचिन तेंडुलकर को प्रतिस्पर्धी से विवाद किए बिना उसे समझाने की सत्शील वृत्ति प्रदान करता है तथा उसके कारण प्रतिस्पर्धी की शत्रुता की भावना कुछ क्षणों में दूर हो जाती है ।
४ ई. अध्यात्म वह ‘जागृति’ है, जो विराट कोहली जैसे आक्रामक खिलाडी के अहंकार का रूपांतरण संवेदनशीलता में करता है, जिसके कारण वे मात्र ‘उत्कृष्ट खिलाडी’ नहीं रह जाते, अपितु एक ‘आदर्श व्यक्ति’ के रूप में सामने आते हैं ।
४ उ. क्रिकेट का खेल मात्र रन बनाना, विकेट लेना, इतने तक ही सीमित नहीं है । वह मन की शक्ति, संयम, स्वभाव परिवर्तन एवं ‘अहं’रहित वृत्ति का दर्पण है । उसे अध्यात्म के आधार पर ही खेलना पडता है । अध्यात्म का आधार लेकर खेलनेवाला खिलाडी पहले अपने दोष एवं अहं पर विजय प्राप्त करता है तथा उसके उपरांत उसे प्रतिस्पर्धी संघ पर विजय प्राप्त करना भी संभव होता है ।
४ ऊ. कला, खेल आदि क्षेत्र में अभ्यास से कौशल प्राप्त किया जा सकता है; परंतु उसे टिकाए रखने के लिए अध्यात्म की आवश्यकता होती है । व्यक्ति को उसके संबंधित क्षेत्र को ‘अध्यात्म’ के रूप में अपनाना पडता है । जब आप कौशल एवं अध्यात्म का संगम करते हैं, तब आप उस खेल (संबंधित क्षेत्र) को अवश्य जीत सकते हैं; साथ ही जीवन पर भी विजय प्राप्त कर सकते हैं । कौशल आपको ‘विजयी’ बनाता है, जबकि उसे अध्यात्म के साथ जोडने से आप ‘महान व्यक्ति’ बन जाते हैं !
५. आवाहन
वर्तमान में भारत के ६५ करोड लोगों को क्रिकेट में रुचि है । उस सभी के साथ अन्य सभी खेलप्रेमियों से यह आवाहन है कि ऊपर उल्लेखित खिलाडियों के केवल पैसे एवं उनकी प्रसिद्धि की ओर ध्यान न देकर, उन्होंने जो अध्यात्म अपनाया, उस पहलु पर भी ध्यान दीजिए । आपके लिए जो साधना (उदा. नामजप, प्रार्थना, कृतज्ञता, स्वभावदोष-निर्मूलन, सत्सेवा, हिन्दू राष्ट्र की स्थापना) संभव है, आप भी वह कीजिए ! उसके लिए सनातन संस्था सदैव आपकी सहायता करेगी ! फलस्वरूप आपका जीवन वास्तव में आनंदमय बनेगा ! यह लेख पढकर प्रत्येक खेलप्रेमी को साधना करने की सद्बुद्धि मिले, यह श्री गुरुचरणों में प्रार्थना है ! (११.१२.२०२५)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?