
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी : अंधेरे कक्ष में वास्तु ठीक से दिखाई न देने के कारण उसका आकार बडा दिखाई देता है; परंतु उस कक्ष में दीप जलाने से वास्तु दिखाई देने पर उसका आकार छोटा क्यों दिखाई देता है ? (२७.१२.२०१९)
श्री. राम होनप :

१. वास्तु एवं पंचतत्त्वों का एक-दूसरे से संबंध
वास्तु की दीवारें, छत एवं उसमें रखी गई वस्तुएं पृथ्वीतत्त्व से संबंधित हैं, जबकि वास्तु में स्थित प्रकाश तेजतत्त्व से संबंधित है । वास्तु में स्थित वायु वायुतत्त्व से तथा वहां की रिक्ति आकाशतत्त्व से संबंधित है । आकाशतत्त्व सबसे सूक्ष्म है तथा वह व्यापक एवं रिक्ति के रूप में होता है ।
२. वास्तु में अंधेरे एवं उजियाले का कक्ष पर परिणाम
वास्तु में जब अंधेरा होता है, तब वास्तु दिखाई नहीं देता, साथ ही वहां पृथ्वीतत्त्व एवं तेजतत्त्व कार्यरत नहीं होते । जब अंधेरा होता है, तब कक्ष में प्रमुखता से आकाशतत्त्व (रिक्ति) कार्यरत होता है । वास्तु में स्थित रिक्ति के कारण वास्तु बडा प्रतीत होता है । इसके विपरीत, वास्तु में दीप जलाने पर वास्तु में प्रमुखता से तेजतत्त्व कार्यरत होकर उससे वास्तु सुस्पष्ट दिखाई देता है । उसके कारण वास्तु में जब अंधेरा होता है, उसकी तुलना में वास्तु में दीप जलाने पर वह छोटा दिखाई देता है ।’
– श्री. राम होनप (सूक्ष्म से प्राप्त ज्ञान), सनातन आश्रम, रामनाथी, गोवा. (ज्ञान प्राप्ति का दिनांक २०.१२.२०२५, समय : सायंकाल ५.३० तथा अवधि १० सेकेंड)
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