जयपुर (राजस्थान) – ‘‘जीवन में सद्गुणों का अभाव और दोषों की अधिकता जीवन को तनावमय बनाती है । हमारे गुण-दोष पर निर्भर है कि हम परिस्थिति को किस दृष्टि से देखते हैं । इसलिए दोष-निर्मूलन के साथ गुण-संवर्धन हेतु प्रयास करते हैं, तो निश्चित ही आनंदमय जीवन बिता सकते हैं’’, ऐसा प्रतिपादन सनातन संस्था की श्रीमती मधुलिका गोयल ने किया । वे संस्था के रजत जयंती महोत्सव निमित्त यहां के श्री अग्रसेन पब्लिक स्कूल में तनावमुक्ति की कार्यशाला को संबोधित कर रही थीं । इस समय विद्यालय के सचिव श्री. कमल नानूवाला, प्राचार्या अमिता कुलवाल, राकेश गर्ग के साथ ४० से अधिक अध्यापक-अध्यापिका उपस्थित थे ।

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‘एन.सी.ई.आर.टी.’ की पाठ्यपुस्तक में मराठा साम्राज्य का इतिहास पुनः सम्मिलित करने के लिए केंद्र सरकार से विचार विमर्श निरंतर हो रहा – दादा भुसे, स्कूली शिक्षा मंत्री आवश्यक सामग्री केंद्र शासन को प्रस्तुत ।