इस्लामिक कानून के अनुसार मुसलमान पुरुषों को है, बहुपत्नीत्व का अधिकार !

चेन्नई – इस्लामिक कानून के अनुसार मुसलमान पुरुषों को बहुपत्नीत्व का अधिकार है; परंतु मुसलमान पुरुष को उसकी पत्नियों के साथ समान व्यवहार करना अनिवार्य होगा । यदि वह ऐसा नहीं करता है, तो वह क्रूरता होगी । पत्नी की उचित देखभाल करना, पति का कर्तव्य है, ऐसा निर्णय मद्रास उच्च न्यायालय ने दिया ।
कनिष्ठ न्यायालय का निर्णय वैध !
एक प्रकरण में पीडित पत्नी ने किए विवाहविच्छेद की मांग स्वीकार करने का कनिष्ठ न्यायालय का निर्णय उच्च न्यायालय ने इस बार वैध कहा है । पति तथा उसके कुटुंबियों ने पहली पीडित पत्नी के साथ छलकपट करने की घटना को उच्च न्यायालय ने स्वीकार किया । गर्भधारणा की अवस्था में भी उसके साथ अनुचित व्यवहार किया गया । इससे दुखी होकर पत्नी ने ससुराल का घर छोड दिया था । तदुपरांत उसके पति ने दूसरा विवाह किया और वह दूसरी पत्नी के साथ रहने लगा ।
क्रूरता के आधार पर पत्नी विवाहविच्छेद की मांग कर सकती है !
अन्य एक प्रकरण में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा था कि क्रूरता के प्रकरणों में न्यायालय ने वैवाहिक संबंध पुनर्स्थापित करने का आदेश देने के पहले अन्य परिस्थतियों का भी विचार करना चाहिए । क्रूरता के आधार पर पत्नी विवाहविच्छेद की मांग कर सकती है ।
संपादकीय भूमिका‘धर्मनिरपेक्ष देश में धर्म के आधार पर केवल मुसलमान पुरुषों को मिला बहुपत्नीत्व का अधिकार सरकार को निरस्त करना चाहिए’, ऐसी मांग अब जनता को करनी चाहिए ! |
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