तीन तलाक विरोधी संहिता लागू होने के ५ वर्ष उपरांत भी ऐसी घटनाओं में कोई कमी नहीं !

नई देहली – केंद्र सरकार ने एक कानून के द्वारा मुसलमान महिलाओं के लिए ‘ट्रिपल तलाक’ (तीन बार ‘तलाक तलाक तलाक’ कहकर विवाह विच्छेद करना ) को समाप्त कर दिया है । उसे पारित किए हुए ५ वर्ष पूर्ण हो गए हैं; किंतु अब भी तीन तलाक के प्रकरण में कोई कमी नहीं हुई है । केंद्रीय विधि मंत्रालय के आंकडों के अनुसार मात्र २०२३ में १ लाख ५७ सहस्त्र ७२५ मुसलमान महिलाओं को तीन तलाक दिया गया है । इनमें से अधिकतर महिलाएं निर्धन हैं ।
अ. १९ सितंबर २०१८ को संहिता लागू होने के उपरांत तीन तलाक के १३ लाख ७ सहस्त्र से अधिक आपराधिक प्रकरण पंजीकृत हो चुके हैं । वर्ष २०१९ में २ लाख ६९ सहस्त्र, वर्ष २०२० में ९५ सहस्त्र, वर्ष २०२१ में ५ लाख ४१ सहस्त्र तथा वर्ष २०२२ में २ लाख ४५ सहस्त्र । इन सभी प्रकरणों में संबंधित महिलाओं को विभिन्न सरकारी संस्थाओऺ द्वारा कानूनी सहायता दी गई ।
आ. सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बी.एस. चौहान ने कहा कि इस संबंध में मुसलमानों के बडे नेताओं को समाज में जागरूकता निर्माण करना अति आवश्यक है । इस कानून की कठोर धाराओं की जानकारी दी जानी चाहिए, साथ ही पीडिता का पक्ष सुने बिना पति की अंतरिम जमानत पर सुनवाई न की जाए । इससे लोगों में दंड के प्रति भय निर्माण होगा तथा वे कानून का पालन करेंगे । न्यायालयों को भी ऐसे प्रकरणों पर कठोरता से विचार करना चाहिए ।
संपादकीय भूमिकामुसलमानों के विरुद्ध चाहे कितने भी कठोर कानून बना दिए जाएं, तब भी वे अपने धर्म का पालन करते हैं तथा डंके की चोट पर बडी संख्या में भारतीय कानूनों का उल्लंघन कर अपराध करते रहते हैं । भविष्य में यदि समान नागरिक संहिता, जनसंख्या नियंत्रण कानून आदि पारित हो भी गए तो मुसलमान इसका कितना पालन करेंगे, इसमें संदेह है ! यह स्थिति हिन्दू राष्ट्र को अपरिहार्य बनाती है ! |
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