
प्रेम से दीर्घकाल तक टीकनेवाला सुख मिलता है; जबकि शारीरिक संबंधों से तात्कालिक सुख मिलता है !
‘पूर्वकाल में पहले मानसिक स्तर पर प्रेम होता था, फिर शारीरिक संबंध बनते थे; परंतु आजकल अनेक पश्चिमी देशों में पहले शारीरिक संबंध बनते हैं और आगे दोनों की बने, तो फिर मानसिक प्रेम निर्माण होता है । इस कारण अभी की पीढी को तात्कालिक सुख तथा दीर्घकालिक दुख भोगना पड रहा है ।’
अंग्रेजी भाषा की सीमा जानें !
‘पूरे विश्व में आज कहीं भी जाएं, तो इस भूतल के विविध विषय अंग्रेजी भाषा में सीखे जाते हैं । इस कारण सर्वत्र अंग्रेजी भाषा महत्त्वपूर्ण हो गई है । सभी लोग यह भाषा सीखने का प्रयास करते हैं । ऐसा होने पर भी मानव जीवन का मुख्य ध्येय ‘ईश्वरप्राप्ति कैसे करनी है’, यह अंग्रेजी भाषा से नहीं सीखा जा सकता ।’
ऋषि-मुनियों पर ‘ईश्वरीय कृपा’ !
‘वेद-उपनिषद लिखनेवाले ऋषि-मुनि पूर्व के सात्त्विक काल में हुए, यह अच्छा हुआ; क्योंकि आज के तामसिक काल में (कलियुग) में उन्हें कोई महत्त्व नहीं मिलता ।’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?