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बीजिंग (चीन) – भारत उसकी नौसेना की शक्ति बढाने के लिए तीसरा विमानवाहक जहाज बनाने वाला है । इस पर चीन का पेट दर्द होने के कारण चीनी सरकार के मुख्यपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने भारत के विरोध में विष उगला है । कागजी ड्रैगन ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने कहा कि भारत कथित रूप से चीन से प्रतिस्पर्धा करने के लिए उसका दूसरा स्वदेशी विमानवाहक जहाज बनाने की तैयारी कर रहा है । विविध चीनी सेना विश्लेषकों का हवाला देते हुए उसने कहा कि स्वयं विमानवाहक जहाज बनाने के लिए सक्षम होना, यह बहुत बडी बात है । ऐसा हुआ, तो भी भारत का चीन से प्रतिस्पर्धा करना, यह उसकी ‘सुरंग दृष्टि’ दर्शाता है । भारत के ‘रक्षा अधिग्रहण परिषद’ की ओर से उसके स्वदेशी विमानवाहक जहाज के अधिग्रहण को स्वीकृति मिलने की संभावना है । इसकी कीमत लगभग ४.८ बिलियन डॉलर (४० सहस्र करोड रुपए) है ।
(सौजन्य : News Nation)
(और इनकी सुनिए…) ‘जब तक भारत चीन को उकसाएगा नहीं, तब तक चीन भारत का शत्रु नहीं !’ – चीन की दर्पोक्ति
१. ग्लोबल टाइम्स ने आगे कहा कि भारत विमानवाहक जहाज बनाकर उसकी नौसेना को विकसित कर सकता है; परंतु यदि उसकी रणनीति चीन केंद्रित होगी, तो इसका विरोध करेंगे । चीन राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का अंगीकार करता है, जो संरक्षात्मक है । इस कारण जब तक भारत चीन को उकसाएगा नहीं, तब तक चीन भारत का शत्रु नहीं ।
२. हिंद महासागर में चीनी नौसेना की उपस्थिति के संबंध में चीन ने कहा कि हमारी उपस्थिति भारत पर ध्यान केंद्रित करने के लिए नहीं है । हमारा उद्देश्य शांतिपूर्ण है । समुद्रीमार्ग की रक्षा और मानवीय सहायता पहुंचाना, यह हमारा उद्देश्य है । इसका लाभ भारत को भी होता है ।
३. चीन ने भारत के प्रस्तावित विमानवाहक जहाज की तुलना उसके नए विमानवाहक जहाज ‘फुजियान’ से की है । उसने कहा कि, ‘फुजियान’ दूसरा स्वदेशी विमानवाहक जहाज है और यह जून २०२२ में ही तैनात किया गया है । यह ८० सहस्र टन पानी का विस्थापन करता है ।
उजान में ‘इलेक्ट्रोमैग्नेटिक कॅटापुल्ट’ नामक तकनीक है जिससे बडे युद्धक विमानों का उडान भरना संभव होता है । भारत के विमानवाहक जहाज में यह अत्याधुनिक तकनीक न होने के कारण फुजियान उसकी अपेक्षा बहुत अच्छा कार्य कर सकता है ।
भारत के प्रस्तावित विमानवाहक जहाज की क्षमता !भारत का प्रस्तावित विमानवाहक जहाज फ्रांस के ‘राफेल’ लडाकू विमान सहित लगभग २८ लडाकू जेट और हेलीकॉप्टर तैनात करने में सक्षम होगा, ऐसा अनुमान है । यह विमानवाहक जहाज ४५ सहस्र टन पानी का विस्थापन करता है । |
४. ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने शेखी बघारते हुए कहा कि, भारत का पहला विमानवाहक जहाज ‘आई.एन.एस. विक्रांत’ हमारे पहले स्वदेशी विमानवाहक जहाज ‘शेडोंग’ की परिचालन क्षमता तक नहीं पहुंच सका । वास्तविकता यह है कि विक्रांत की निर्मिति शेडोंग की अपेक्षा बहुत पहले चालू हुई थी । शेडोंग ने इस वर्ष पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में अनेक सुदूर समुद्री अभ्यासों में स्वयं की लडाकू क्षमता का प्रदर्शन किया । ऐसा हुआ, तो भी ‘ग्लोबल टाइम्स’ यह पूर्णतया भूल गया कि चीन ने अपना पहला विमानवाहक जहाज यूक्रेन से कबाड खरीदकर और रशिया की तकनीक चोरी कर विकसित किया ।
संपादकीय भूमिका‘किसी एक देश के उदय के कारण अपने ऊपर संकट आ सकता है’, इस डर से उससे तुलना कर उसे कम आंकने का प्रयास किया जाता है, ऐसा मनोविज्ञान बताता है । चीन का भी यह प्रयास भारत भय से ग्रसित हुआ है, यही बात समझ में आती है ! |
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