
मुंबई (महाराष्ट्र) – वर्ष १९८७ में हिन्दुत्व का प्रचार किया; इसलिए चुनाव आयोग ने शिवसेना प्रमुख का मतदान का अधिकार ६ वर्षों के लिए छीन लिया । लेकिन आज चुनाव आयोग ने आचारसंहिता में बदलाव किया है, ऐसा हमें लगता है । यदि ऐसा है, तो चुनाव आयोग को स्पष्ट करना चाहिए, ऐसा आवाहन उद्धव ठाकरे ने १६ नवंबर के दिन पत्रकार परिषद में किया ।
कर्नाटक राज्य में चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मतदान करते समय ‘बजरंगबली की जय’ ऐसा कहने का आह्वान किया, तो कुछ दिनों पूर्व अमित शाह ने मध्य प्रदेश में भाजपा को चुने जाने पर श्री रामलला के दर्शन के लिए निशुल्क ले जाने की घोषणा की । यदि ऐसा है, तो हम भी आनेवाले चुनाव में जनता से आवाहन करते हैं कि, ‘जय भवानी’, ‘जय शिवाजी’, ‘हर हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’, ‘गणपति बप्पा मोरया’ ऐसा कहकर ही मतदान करें । वर्ष १९८७ में मुंबई के पारले में हुए उपचुनाव के समय हमारी ओर से रमेश प्रभु जीते थे । भाजपा हमारे विरोध में थी । यह पहला चुनाव हमने हिन्दुत्व के सूत्र पर जीता । उस समय बालासाहब ठाकरे का मतदान का अधिकार छीन लिया गया था । यह सही था या अब प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृहमंत्री जो कर रहे हैं, यह सही है ? ऐसा प्रश्न इस समय उद्धव ठाकरे ने सामने रखा ।
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हिन्दु विवाह अधिनियम के अनुसार विवाह को वैध ठहराने के लिए केवल विवाह प्रमाणपत्र होना पर्याप्त नहीं है ।– Gujrat High Court
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