
रामनाथी (गोवा) – भारताचार्य सु.ग. शेवडे (आयु ८९ वर्ष) ने १९ अक्टूबर २०२३ को यहां स्थित सनातन के आश्रम का अवलोकन किया । इस अवसर पर उन्होंने आश्रम में चल रहे राष्ट्र एवं धर्म से संबंधित कार्य की जानकारी ली ।
भारताचार्य सु.ग. शेवडे का परिचय![]() विश्वविख्यात प्रवचनकार भारताचार्य सु.ग. शेवडे (आयु ८९ वर्ष) ने वर्ष १९७६ में इंदौर के महान संत नाना महाराज तराणेकर से अनुग्रह लिया । उनकी आज्ञा से श्री. शेवडे ने विद्यालय के प्रधानाध्यापक के पद की नौकरी से त्यागपत्र देकर स्वयं को धर्मप्रसार के कार्य में समर्पित किया । उन्होंने संपूर्ण विश्व में १३ सहस्र ५०० से अधिक प्रवचन लिए हैं । उन्होंने अमेरिका में ५५० प्रवचन लिए हैं । वर्ष २०१६-१७ में इंग्लैंड के ‘हाउस ऑफ कॉमन्स’ अर्थात वहां की संसद को संबोधित करते हुए उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज की जानकारी दी । श्री. सु.ग. शेवडे ने अपने ‘संभाजी’ पुस्तक में छत्रपति संभाजी महाराज के विषय में विगत अनेक दशकों से किए जानेवाले दुष्प्रचार का प्रमाणोंसहित खंडन किया । उसके कारण आगे जाकर छत्रपति संभाजी महाराज के विषय में होनेवाला दुष्प्रचार रोका । सनातन संस्था के प्रेरणास्रोत प.पू. भक्तराज महाराजजी के साथ भी उनका परिचय था । उन्होंने अनेक बार प.पू. भक्तराज महाराजजी के भजनों के कार्यक्रम का लाभ उठाया है । प्रसिद्ध हिन्दुत्वनिष्ठ लेखक तथा व्याख्याता डॉ. सच्चिदानंद शेवडे भारताचार्य सु.ग. शेवडे के पुत्र हैं, जबकि आयुर्वेदाचार्य वैद्य परीक्षित शेवडे उनके पौत्र हैं । |
सनातन संस्था की ओर से भारताचार्य सु.ग. शेवडे को सम्मानित किया गया !
सनातन संस्था की ओर से सनातन के संत पू. पृथ्वीराज हजारेजी ने भारताचार्य सु.ग. शेवडे को पुष्पमाला, शॉल, श्रीफल एवं भेंटवस्तु देकर सम्मानित किया । इस अवसर पर उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी में साधकों का मार्गदर्शन किया । इस अवसर पर श्री. शेवडे ने उनके गुरु संत नाना महाराज तराणेकरजी एवं प.पू. भक्तराज महाराजजी की निकटता का भी उल्लेख किया । सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी के भारताचार्य सु.ग. शेवडे के साथ बहुत निकट के संबंध हैं ।
भारताचार्य सु.ग. शेवडे ने अपने मार्गदर्शन में हिन्दू धर्म एवं वेदों की महानता विशद की, साथ ही उन्होंने मनुष्य के सुखी जीवन के लिए ज्योतिषशास्त्र की आवश्यकता के भी उदाहरण दिए ।
| ‘सनातन संस्था एकमात्र संस्था है, जो श्रद्धा, ज्ञान निर्माण करती है । संस्था में ‘श्रद्धा’ ही नींव है’, ऐसा भारताचार्य सु.ग. शेवडे ने आग्रहपूर्वक बाताया । |
भारताचार्य सु.ग. शेवडे द्वारा सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के विषय में व्यक्त गौरवोद्गार !

१. डॉ. आठवलेजी से बहुत पहले जब मेरी भेंट हुई थी, उस समय ‘यह व्यक्ति आगे बहुत बडा कार्य करेगा’, यह मेरे ध्यान में आया था । वही सत्य हुआ । उन्होंने इतने बडे सनातन आश्रम का निर्माण किया, जहां ‘साधना कर ईश्वरप्राप्ति करने’ को मंत्र मानकर निःस्वार्थभाव से विश्वकल्याण का कार्य हो रहा है ।
२. प.पू. डॉ. आठवलेजी एक उत्तम शिष्य हैं । जिस शिष्य में ज्ञानलालसा होती है, वही ज्ञान ग्रहण करता है । वही प.पू. डॉक्टरजी ने किया । आज वे ज्ञान की एक भिन्न ऊंचाई पर पहुंच गए हैं । ज्ञान के आधार पर उनके द्वारा किया जा रहा कार्य पृथ्वी पर अन्य कहीं नहीं है; इसलिए मुझे सनातन के साधकों से ईर्ष्या होती है । अब मेरी आयु बढ गई है, अन्यथा मैं भी आपकी ईभांति इस कार्य में सम्मिलित होता । आप साधक पुण्यवान हैं; इसलिए आप सनातन के आश्रम में आए हैं ।
३. प.पू. डॉक्टरजी ने उनकी रुचि उनके शिष्यों पर न थोपकर शिष्यों को जिस क्षेत्र में रुचि है, उससे संबंधित प्रचुर मात्रा में सेवा उपलब्ध कराई है । भगवद्प्राप्ति की लालसा के कारण ज्ञान प्राप्त करना तथा भगवद्चिंतन के साथ सेवा करना बहुत ही दुर्लभ है, जो सनातन के आश्रम में देखने के लिए मिलती है ।

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