
नवरात्रिके नौ दिनों में घटस्थापना के उपरांत शुक्ल पंचमी से लेकर शुक्ल नवमी तक की तिथियों का विशेष महत्त्व है । पंचमी के दिन देवी के नौ रूपों में से एक श्री ललिता देवी अर्थात महात्रिपुरसुंदरी का व्रत होता है । शुक्ल अष्टमी एवं नवमी ये महातिथियां हैं । इन तिथियों पर चंडीहोम करते हैं । नवमी पर चंडीहोम के साथ बलि समर्पण करते हैं । इस लेख में हम नवरात्रि की सप्तमी तिथि का संक्षेप में महत्त्व जानकर लेते हैं ।
नवरात्रि की सप्तमी तिथि
नवरात्रि की सप्तमी तिथि को श्री दुर्गादेवी के असुर, भूत-प्रेत इत्यादि का नाश करनेवाले ‘कालरात्रि’ रूप की पूजा की जाती है।
बंगाल में दुर्गापूजा की सप्तमी पर नदी अथवा किसी जलाशय से पांच कलशों में जल लाकर श्री गणपति, श्री महालक्ष्मी, श्री कार्तिकेय, श्री सरस्वती देवी तथा श्री दुर्गादेवी के लिए घटस्थापना करते हैं । यहां विशेष बाता यह है कि, इस दिन केले के पेड के तने को पीली साडी पहनाकर श्री गणपति की मूर्ति के साथ रखते हैं तथा श्री गणपति की शक्ति के प्रतीक के रूप में पूजा करते हैं ।
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मंदिरों के प्रतिनिधियों एवं हिन्दुओं का संगठन आवश्यक ! – रमेश शिंदे, राष्ट्रीय प्रवक्ता, हिन्दू जनजागृति समिति
(और इनकी सुनिए …) ‘मार्ग पर नमाज पढना अनुचित है, तो सभी त्योहारों के उत्सवों पर प्रतिबंध लगाइए !’ : AIMIM Asaduddin Owaisi
हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अमृता विश्वविद्यापीठम् के निदेशक डॉ. यु. कृष्णकुमार से सद्भावना भेंट !
आपातकालीन स्थिति : ऊर्जा सुरक्षा, अति आवश्यक आपूर्ति एवं ऊर्जा की बचत !