
देश इसी कारण दुर्दशा की उच्चतम सीमा तक पहुंच गया है !
‘सुख पाने से जुडी सभी बातें सिखानेवाले माता-पिता और सरकार बच्चों को अच्छा एवं सात्त्विक कुछ नहीं सिखाते । इस कारण देश दुर्दशा की उच्चतम सीमा तक पहुंच गया है । इसका एक ही उपाय है और वह है हिन्दू राष्ट्र की स्थापना !’
ईश्वरीय कानून एवं जमा खर्च का महत्त्व !
‘पृथ्वी के कानून और जमा-खर्च आदि सब व्यर्थ हैं । अंत में प्रत्येक को ईश्वरीय कानून एवं जमा-खर्च इत्यादि का सामना करना पडता है ।’
हिन्दू धर्म की सीख को अनुचित कहनेवाले बुद्धिप्रमाणवादियों का हिन्दूद्रोह !
‘कुछ पंथ पैसे देकर अथवा धमकी देकर अन्य लोगों को अपने पथ में लाते हैं । इसके विपरीत हिन्दू धर्म की अद्वितीय सीख के कारण लोग उसे अपनाते हैं । तब भी बुद्धिप्रमाणवादी हिन्दू धर्म की सीख को अनुचित कहते हैं !’
अन्य धर्मियों एवं हिन्दुओं के ध्येय में भेद !
‘अन्य धर्मियों का ध्येय होता है ‘दूसरे धर्म के लोगों पर वर्चस्व स्थापित करना ।’ जबकि हिन्दुओं का ध्येय होता है, ईश्वरप्राप्ति !’
बुद्धिप्रमाणवादियों द्वारा चुकाया जानेवाला मूल्य !
‘जो बुद्धिप्रमाणवादी ऐसा कहते हैं कि ईश्वर नहीं है, क्या उन्हें कभी उस निरंतर आनंद की अनुभूति होगी, जो भक्तों को होती है ?’
– सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवले
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के ओजस्वी विचार
Dhaka Hindu Protest : ढाका में हिन्दुओं ने निकाला विशाल मशाल जुलूस !
छोटे बच्चों को गोमांस देने का परामर्श का प्रकरण !
संपादकीय : नागरिक शास्त्र केवल पुस्तक में ?
केरल में दीपप्रज्वलन का विवाद : राष्ट्रीय व्यक्तित्व की आत्मा संस्कृति है या धर्म ?
हिन्दुत्वनिष्ठ कार्यकर्ताओं के लिए आदर्श जीवन-पद्धति का महत्त्व !