
कर्नाटक में कांग्रेस का शासन आने के उपरांत वहां कांग्रेस की मानसिकता पुनः एक बार सामने आई है । ‘कश्मीर में जिस प्रकार आतंकियों ने वहां की जनता से सहायता लेकर वहां से हिन्दुओं को पलायन करने के लिए बाध्य किया, क्या वैसी स्थिति अब कांग्रेसशासित राज्यों में होगी ?’, ऐसा संदेह कर्नाटक की स्थिति देखकर उत्पन्न हो रहा है । इसका कारण है, कांग्रेस का मुसलमानों के प्रति प्रेम तथा मुस्लिम वोटबैंक ! जिन हिन्दुओं के मतों पर कांग्रेस ने आधे दशक तक भारत पर राज किया, उसी कांग्रेस ने अब हिन्दुओं को ही मिटाने का बीडा उठाया हैै, यह कर्नाटक में हो रही घटनाओं से प्रमाणित हो रहा है । कर्नाटक विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने हिजाब बंदी, धर्मांतरण बंदी कानून, पाठ्यक्रम में राष्ट्रपुरुषों के पाठ जैसे निवर्तमान भाजपा शासन द्वारा लिए गए निर्णयों में परिवर्तन करना सुनिश्चित किया । सत्ता में आते ही कांग्रेस ने उसक तुष्टीकरण का घृणित खेल खेलना आरंभ कर निवर्तमान भाजपा सरकार द्वारा बनाया गया धर्मांतरण विरोधी कानून रद्द करने का निर्णय लिया । इतना ही नहीं, अपितु क्रमिक पुस्तकों से रा.स्व. संघ के संस्थापक डॉ. केशव बळीराम हेडगेवार तथा वीर सावरकर पर आधारित पाठ हटाने के लिए भी मान्यता दी है । इससे कांग्रेस के मन में हिन्दुत्व के प्रति कितना द्वेष भरा हुआ है, यह बडी सहजता से समझ में आता है ।

कांग्रेस ने इस देश में सत्ता में होते समय सदैव ही हिन्दुओं की उपेक्षा कर उनका दमन करने का प्रयास किया । सत्ता की लालसा एवं कुर्सी के मोह के चलते कांग्रेस ने देश को स्वतंत्रता मिलने से लेकर वर्ष २०१४ तक देश के अंदर अनेक समस्याओं को जन्म दिया, जिनके परिणाम जनता अभी भी भुगत रही है । कांग्रेस के नेताओं में निहित मुसलमानों के प्रति प्रेम के कारण तथा उन नेताओं की निष्क्रियता के कारण ही कश्मीर के लाखों हिन्दुओं को अपने प्राणों का बलिदान देना पडा । ‘सदैव ही हिन्दू एवं हिन्दुत्व के प्रति नकारात्मक भावना रखनेवाली यह कांग्रेस वर्ष २०१४ के उपरांत भी यदि केंद्र में सत्ता में आती, तो यहां के हिन्दुओं की क्या स्थिति हो जाती ?’, इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती ! सत्ता के बिना कांग्रेस अपना अस्तित्व टिकाए नहीं रख सकती ।
कांग्रेस की कुसंस्कृति

आज के समय में देश के ४ राज्यों में कांग्रेस सत्ता में है । कांग्रेस ने कर्नाटक की भांति वहां भी मुसलमानों का तुष्टीकरण कर हिन्दुओं का दमन करना आरंभ किया, तो उसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए । आज कांग्रेस के नेता भाजपा को सत्ता से दूर रखने के लिए अन्य राजनीतिक दलों को साथ लेकर केंद्र में पुनः सत्ता हथियाने का प्रयास कर रहे हैं । कांग्रेस के राहुल गांधी जैसे नेता तथा अंदर से संपूर्णतया खोखली बनी कांग्रेस इस देश को नहीं संभाल सकती, इसे मतदाता ने भलीभांति पहचान लिया है । कांग्रेस को इस देश की संस्कृति, उज्ज्वल परंपरा तथा यहां की मिट्टी से कोई लेना-देना नहीं है । केवल परिवारवाद चलाकर अपना स्वार्थ साधकर अन्यों का शोषण करना ही उनकी एकमात्र (कु)संस्कृति है ! उसके कारण ही वर्ष २०१४ में मतदाताओं ने कांग्रेस को पाठ पढाकर घर पर बिठाया । इतना होकर भी कांग्रेस ने कुछ सीखा नहीं, यह उसका दुर्भाग्य कहना पडेगा !
वैचारिक लडाई की आवश्यकता !
लव जिहाद, लैंड जिहाद, हलाल प्रमाणपत्र, काशी-मथुरा मुक्ति, धर्मांतरण, गोहत्या, मंदिर संस्कृति की रक्षा, राष्ट्रपुरुषों का अनादर जैसे विभिन्न विषयों पर हिन्दुओं में जागृति आने से देश के अनेक स्थानों पर हिन्दुत्वनिष्ठ संगठन फेरियां निकाल रहे हैं, तो कुछ स्थानों पर आंदोलन चलाए जा रहे हैं । मुसलमानों की वोटबैंक के आधार पर सत्ता में आए कांग्रेस के मुख्यमंत्री, सांसद एवं विधायक हिन्दुओं की मांगों की उपेक्षा कर उनका दमन कर रहे हैं । इसलिए यहां से आगे संतों, महंतों, हिन्दुत्वनिष्ठों तथा हिन्दुओं के साथ हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाकर तथा उनकी रक्षा करने के लिए हिन्दुओं को उन्हें संरक्षण देनेवाले तथा प्रत्यक्ष कार्य कर हिन्दुओं का हित साधनेवाले राज्यकर्ताओं को चुनकर लाना आवश्यक है । यदि ऐसा हुआ, तभी जाकर देश में हिन्दू राष्ट्र आएगा । हिन्दुओं को जातियां एवं वर्णभेद को भूलकर तथा संगठित होकर धर्म के आधार पर कार्य किया, तो देश में हिन्दू राष्ट्र की स्थापना होने में समय नहीं लगेगा । समर्थ रामदासस्वामीजी ने धर्म एवं अध्यात्म के माध्यम से तत्कालीन चुनौतियों का सामना किया । समर्थ रामदासस्वामीजी ने हिन्दुत्व के प्रति लोगों में चैतन्य जागृत कर उनमें क्षात्रवृत्ति जगाई । उन्होंने ‘तुम हिन्दू हों’, इसका लोगों को स्मरण दिलाया । बिपिन चंद्र पाल, लोकमान्य टिळक, वीर सावरकर एवं लाला लाजपत राय समाजसुधारक थे । ये सभी हिन्दुत्व को आगे ले गए । बिपिनचंद्र पाल ने ‘सोल ऑफ इंडिया’ नामक पुस्तक लिखी है । हिन्दुओं को जागृत करना ही यह पुस्तक लिखने का उनका उद्देश्य था । उन्होंने उन्होंने बताया था कि ‘भारत हिन्दू राष्ट्र है ।’ गोवा राज्य के रामनाथी में हुए ‘वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव में लव जिहाद, लैंड जिहाद, हलाल सर्टिफिकेशन, काशी-मथुरा मुक्ति, धर्मांतरण, गोहत्या, मंदिर संस्कृति की रक्षा, कश्मीरी हिन्दुओं को उनकी भूमि में पुनर्वास, पाकिस्तान एवं बांग्लादेश के हिन्दुओं पर हो रहे अत्याचार जैसे विभिन्न विषयों पर विचारमंथन हुआ । इसके साथ ही उसमें हिन्दू राष्ट्र की वैचारिक दिशा स्पष्ट करनेवाला ‘हिन्दू राष्ट्र संसद’ संपन्न हुआ, साथ ही उसमें हिन्दू राष्ट्र की स्थापना के कार्य के क्रियान्वयन का प्रारूप भी तैयार किया गया । कुल मिलाकर देश में वैचारिक लडाई के द्वारा कांग्रेस जैसे दुष्ट राजनीतिक दलों की वैचारिक पराजय कर हिन्दू राष्ट्र की स्थापना करने के उपरांत ही हिन्दुओं की समस्याओं का समाधान होगा, यह त्रिवार सत्य है !
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