
रामनाथी, २३ जून – दैनिक ‘सनातन प्रभात’ने इस वर्ष रजतमहोत्सवीय अर्थात २५ वें वर्ष में पदार्पण किया है । व्या वर्षात पदार्पण केले आहे. हिन्दुत्वनिष्ठ संगठनों के हिन्दूहित के आंदोलनों को ‘सनातन प्रभात’ के कारण वैचारिक बल मिलता है ।
नास्तिकतावादियों द्वारा विभिन्न हिन्दू त्योहारों के विरुद्ध धर्मद्रोही आवाहन किए जाते हैं । उसके विरुद्ध ‘सनातन प्रभात’ केवल समाचार छापकर नहीं रुकता, अपितु संबंधित त्योहार का धर्मशास्त्रीय दृष्टिकोण भी छापता है । इसके परिणामस्वरूप हिन्दुओं को धर्मशास्त्रीय भूमिका समझ में आती है ।

सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी ने आरंभ से ही सनातन के साधकों को यह सिखाया कि ‘सनातन का प्रत्येक साधक पत्रकार है । इसके साथ ही हम यह मानते हैं कि ‘हिन्दू राष्ट्र की स्थापना का कार्य करनेवाला हिन्दू राष्ट्रवीर भी ‘सनातन प्रभात’ का पत्रकार है ।’

देश एवं विश्व में जहां-जहां हिन्दुओं पर अन्याय होगा, आघात होंगे, आक्रमण होंगे तथा अत्याचार होंगे, ‘सनातन प्रभात’ उनकी आवाज बनकर उन पर हो रहे अत्याचारों को समाज के सामने लाएगा, ऐसा आश्वासक प्रतिपादन ‘सनातन प्रभात’ नियतकालिक समूह के सहसंपादक श्री. संदीप शिंदे ने किया । १६ से २२ जून की अवधि में यहां संपन्न वैश्विक हिन्दू राष्ट्र महोत्सव में उपस्थिथ हिन्दुत्वनिष्ठों को संबोधित करते हुए ऐसा बोल रहे थे ।
सात्त्विकता एवं संगठन ही राष्ट्र के उत्कर्ष की चाबी – जगद्गुरु श्री रामानंदाचार्य नरेंद्राचार्यजी
यदि मुसलमान अपने पूर्वजों की परंपराओं को स्वीकार करें, तो उन्हें हिन्दू राष्ट्र में किसी प्रकार का कोई संकट नहीं होगा ! – Yogrishi Ramdev baba
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