
धार्मिक
‘लव जिहाद’ के पीछे जो षड्यंत्र है, वह धार्मिक है । जब तक मुसलमानों के धार्मिक सीख का मूल ध्यान में नहीं लेते, तब तक १ सहस्र ३०० वर्ष से तलवार, बंदूक, प्रेम द्वारा हो रहा हिन्दुओं का धर्म-परिवर्तन नहीं रुकेगा ।
१. इस्लाम की कार्यपद्धति
‘काफिरों को मुसलमान बनाना एवं संपूर्ण जग इस्लाममय करना’, इस ध्येयपूर्ति के मार्ग में पवित्र अथवा अपवित्र, ऐसा भेद मुसलमानों के लिए नहीं होता; क्योंकि इस्लाम में कार्यपद्धति महत्त्वपूर्ण नहीं, अपितु अंतिम परिणाम महत्त्वपूर्ण माना जाता है । इस्लाम विस्तार की तीन अवस्थाएं हैं – सामर्थ्य अल्प हो तब भाग जाना, समान सामर्थ्य होने पर ‘करार’ अर्थात मीठा बोलकर रहना और सत्तासामर्थ्य प्राप्त होने पर बलप्रयोग करना । इसलिए ‘लव जिहाद’ कोई आधुनिक काल का नया प्रवाह नहीं: अपितु वह परंपरागत चले आ रहे ‘धर्मांतरण’का जिहाद ही है । हिन्दुस्थान में मुसलमान अल्पसंख्यक होने पर उनमें सत्तासामर्थ्य नहीं है; इसलिए यहां प्रेम का मार्ग चुना गया है ।’
२. धर्मांध मौलवी की सीख
उत्तर प्रदेश में गुप्तचर अधिकारियों के निरीक्षण अनुसार कुछ मौलवी जिहादी युवकों को यह कहकर बुद्धिभेद करते हैं कि ‘हिन्दू युवती को प्रेमजाल में फांसकर, उससे बच्चे जन्म देने पर तुम्हें स्वर्ग मिलेगा । इससे इस्लाम का विस्तार होने से अल्लाह की कृपादृष्टि तुम पर सदैव बनी रहेगी ।’
– ममता त्रिपाठी, स्तंभलेखिका
अंतरराष्ट्रीय
‘लव जिहाद’ अर्थात भारत की हिन्दू युवतियों को धर्मांतरित करने हेतु शत्रु राष्ट्रों द्वारा रचा गया अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र ! इसमें इस्लामी राष्ट्र बडी संख्या में सहभागी होकर यह षड्यंत्र रच रहे हैं ।
१. ‘लव जिहाद’ के लिए अरब राष्ट्रों से पैसों की आपूर्ति !
‘केरल में समाचार-पत्रों के मतानुसार ‘लव जिहाद’ के लिए अरब राष्ट्रों से भारी मात्रा में पैसा भेजा जाता है । दमाम (सऊदी अरब) में ‘इंडियन फ्रैटर्निटी फोरम’ नामक संस्था इसी उद्देश्य के लिए पैसे एकत्र करती है । ‘लव जिहाद’ के लिए सउदी अरब से ‘वेस्टर्न यूनियन मनी ट्रान्सफर’ के माध्यम से हवाला द्वारा पैसा आता है । भारत के आभूषणों के व्यावसायिकों की अरब राष्ट्रों में शाखाएं हैं । उस माध्यम से भी पैसों का स्थलांतर किया जाता है । हज के लिए जानेवाले यात्रियों के माध्यम से भी पैसों का स्थलांतर किया जाता है; क्योंकि हज से आनेवाले विमान के यात्रियों की कडी जांच नहीं होती, इसलिए इसका अनुचित लाभ उठाया जाता है ।’
२. ‘लव जिहाद’ ‘लष्कर-ए-तैयबा’ का छिपा युद्ध !
‘पाकिस्तान के ‘लष्कर-ए-तैयबा’ नामक आतंकवादी संगठन द्वारा १९९६ से ‘लव जिहाद’ के माध्यम से हिन्दुस्थान में कार्य करना प्रारंभ किया । ‘लष्कर-ए-तैयबा’ द्वारा ‘लव जिहाद’ के लिए मुसलमान युवकों के लिए भारी मात्रा में पैसा, अत्याधुनिक साधन-सुविधा एवं नियोजनबद्ध रूपरेखा दी जाती है ।’
(संदर्भ : ‘हिन्दू जनजागृति समिति’ का जालस्थल)
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