
देहरादून (उत्तराखंड) – भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है । इसलिए, यहां किसी भी समाज की धार्मिक भावना आहत करने के अपराध की अनदेखी नहीं की जा सकती, यह विचार उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने व्यक्त किया है । भारतीय दंड संहिता २९५ अ के अंतर्गत आरोपी के विरुद्ध पंजीबद्ध अपराध को निरस्त करने की मांग को अस्वीकार करते हुए न्यायालय ने यह मत व्यक्त किया है ।
आईपीसी की धारा 295A | देश के 'धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने' को प्रभावित करने वाले अपराधों को कम नहीं आंका जा सकता: उत्तराखंड हाईकोर्ट #Police #UttarakhandHighCourt https://t.co/DqVqyp6yYw
— Live Law Hindi (@LivelawH) April 25, 2023
न्यायालय ने आगे कहा कि भारत में प्रत्येक नागरिक के लिए दूसरे धर्म का सम्मान रखना आवश्यक है । यदि ऐसा नहीं होगा और अन्य धर्मीयों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं, तो ऐसी घटनाएं समाज को निकल जाएंगी । इससे समाज में अशांति और शत्रुता बढ़ेगी ।
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