
१. गर्मी के विकारों के कुछ लक्षण
गला, छाती अथवा पेट में जलन होना; मूत्रविसर्जन के समय जलन होना; शरीर पर फोडे आना; आंखें, हाथ अथवा पैरों का गर्म हो जाना; मासिक धर्म के समय अधिक रक्तस्राव होना तथा शौच में रक्त जाना
२. घरेलू औषधियां
अ. चाय का एक चम्मच सब्जा अथवा तुलसी के बीजों को पौन कटोरा पानी में ८ घंटे तक भिगोए रखें । उसके पश्चात उसे एक कप दूध में (टिप्पणी १) डालकर सायंकाल में पीएं ।
टिप्पणी
१. दूध पीने के संदर्भ में सामान्य नियम : औषधियुक्त अथवा औषधिरहित दूध पीने से ३ घंटे पहले तथा दूध पीने के न्यूनतम डेढ घंटे तक कुछ न खाएं ।
आ. १ चम्मच गाढे शरबत को एक कप दूध में डालकर सायंकाल में पीएं । उसमें उक्त पद्धति से भिगोए हुए सब्जा के अथवा तुलसी के बीज भी डाल सकते हैं ।
इ. दिन में १ – २ बार आवश्यकता के अनुसार गुलाब का शरबत पीएं अथवा १ – १ चम्मच गुलकंद खाएं ।
– वैद्य मेघराज पराडकर (१८.२.२०१८)
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
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