
अमरनाथ स्थित गुहा में बर्फ का शिवलिंग निर्मित होता है । इस गुहा में भगवान शिव ने देवी पार्वती को इस गुहा में अमरत्व का ज्ञान दिया था । इसलिए इस गुहा का महत्त्व है । देवी पार्वती को अमरकथा सुनाने के लिए लेकर जाते समय भगवान शिव ने मार्ग में सर्वप्रथम अपने वाहन नंदी का त्याग किया । उसके उपरांत चंदनबाडी में जटा से चंद्र को मुक्त किया । शेषनाग के एक तालाब पर पहुंचने पर उन्होंने गले से सांपों को उतार दिया । अपने प्रिय पुत्र गणेशजी को उन्होंने महागुणस पर्वत पर छोडा । उसके उपरांत पंचतरणी पर जाकर भगवान शिव ने पाचों तत्त्वों का त्याग किया ।
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. जयंत आठवलेजी के चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम !
संपादकीय : आर्थिक अनुशासन
हिन्दू जनजागृति समिति के हिन्दू राष्ट्र संपर्क अभियान अंतर्गत राष्ट्रीय मार्गदर्शक सद्गुरु डॉ. चारुदत्त पिंगळेजी की मध्य प्रदेश यात्रा !
ज्ञानमूर्ति, निर्गुण तत्त्व की नित्य अनुभूति देनेवाले एवं ब्रह्मानंद में निमग्न रहनेवाले सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी
सच्चिदानंद परब्रह्म गुरुदेवजी द्वारा ३० वर्ष पूर्व दिए गए आशीर्वचन को साधक क्षण-क्षण अनुभव कर रहे हैं !
सच्चिदानंद परब्रह्म डॉ. आठवलेजी एकमेवाद्वितीय एवं अवतारी पुरुष क्यों हैं ?